नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। भाजपा के प्रधानमंत्री उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को परोक्ष रूप से अपना चेहरा बता चुका राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ सरसंघचालक मोहन भागवत के बयान से उपजे विवाद पर ठंडा पानी डालने में जुट गया है। भागवत ने एक अंदरूनी चर्चा के दौरान अपने प्रचारकों से कहा था, 'नमो-नमो संघ के लिए मुद्दा नहीं है।' संघ ने तत्काल इस बयान का मतलब स्पष्ट करते हुए कहा कि वह संप्रग सरकार के कुशासन को उजागर करने को कह रहे थे।

पिछले महीनों में खुद भागवत राष्ट्रवादी और हिंदूवादी प्रधानमंत्री की बात कहकर नरेंद्र मोदी का समर्थन करते रहे हैं। तीन दिन पहले संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले यह कहने से भी नहीं चूके थे कि मोदी एक स्वयंसेवक भी रह चुके हैं और इस पर संघ को गर्व है। ऐसे में दो दिन पहले खत्म हुई संघ की प्रतिनिधि सभा की बैठक में भागवत के उस बयान ने मीडिया में विवाद खड़ा कर दिया, जिसमें उन्होंने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा था, 'नमो-नमो हमारा मुद्दा नहीं है। हम राजनीतिक दल नहीं है और हमारी सीमा है। हमारा ध्यान राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर होना चाहिए। संघ-संघ और डॉ. हेडगेवार करो।' जाहिर तौर पर इसकी एक व्याख्या यह थी कि संघ ने अब नरेंद्र मोदी से ध्यान हटा लिया है।

बहरहाल, संघ ही तत्काल क्षतिपूर्ति में जुट गया। प्रवक्ता राम माधव ने इस व्याख्या पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरसंघचालक ने उन मुद्दों को उठाने की बात कही है, जिससे देश जूझ रहा है। उन्होंने यह भी निर्देश दिया है कि मतदान फीसद बढ़ाने के लिए हर स्वयंसेवक काम करे। एक अन्य पदाधिकारी विराग ने कहा कि भागवत ने मतदाताओं तक जाने, उन्हें मुद्दों को समझाने और देशहित के लिए मतदान करने के लिए हर किसी को प्रेरित करने को कहा है। लिहाजा, इसका कोई राजनीतिक अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए। भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने भी इसी सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि भागवत ने देश में बदलाव की बात कही है और सभी को इसी के लिए प्रेरित किया है।

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