मनीष तिवारी, नई दिल्ली। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना नेशनल रोपवे विकास कार्यक्रम के प्रति राज्यों में रुझान बढ़ता जा रहा है। अगर सब कुछ सही रहा तो जल्द ही पूरे देश में रोपवे परियोजनाओं का जाल नजर आएगा। बनारस, उज्जैन, केदारनाथ, हेमकुंड साहिब, श्रीनगर, त्रयंबकेश्वर समेत आठ धार्मिक स्थलों में रोपवे परियोजनाओं पर अमल की दिशा में आगे बढ़ने के साथ राज्यों से अपने-अपने यहां इसी तरह की रोपवे परियोजनाओं के प्रस्तावों की झड़ी लग गई है।

अब तक 25 राज्यों से 260 से अधिक प्रस्ताव मिले

रोपवे के निर्माण की जिम्मेदारी संभालने वाली केंद्र सरकार की कंपनी नेशनल हाईवेज लाजिस्टिक मैनेजमेंट लिमिटेड (एनएचएलएमएल) को अब तक 25 राज्यों से 260 से अधिक रोपवे के प्रस्ताव मिल चुके हैं। एनएचएलएमएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक प्रकाश गौड़ के अनुसार रोपवे परियोजनाओं के लिए राज्यों का उत्साह देखने लायक है। उनके एक-एक प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है।

शहरी ट्रांसपोर्ट का बोझ होगा कम

खास बात यह है कि ये सभी प्रस्ताव धार्मिक स्थलों की यात्रा करने वाले लोगों को सुविधा प्रदान करने के साथ-साथ शहरी ट्रांसपोर्ट का बोझ कम करने के लिए हैं। रोपवे को अब शहरी परिवहन का हिस्सा माना जाने लगा है। रोपवे मेट्रो का विकल्प नहीं हो सकते, लेकिन यह लास्ट माइल कनेक्टिविटी के लिए शहरों में ट्रैफिक की समस्याएं कुछ हद तक दूर कर सकते हैं। बनारस में रोपवे की परियोजना अरबन ट्रांसपोर्ट के लिए है। जबलपुर से भी ऐसा प्रस्ताव मिला है, जहां दो जगह रोपवे बनाने का प्रस्ताव है।

तेज गति से चल रहा है प्रस्ताव पर काम

प्रकाश गौड़ ने बताया कि राज्यों से जो प्रस्ताव मिले हैं, उनमें से 20 की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर ली गई है और लगभग 45 प्रस्तावों की व्यावहारिकता का परीक्षण किया जा रहा है। इनके बारे में भी जल्द निर्णय ले लिया जाएगा। अपने यहां रोपवे की इच्छा जताने वाले राज्यों में आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, केरल और जम्मू-कश्मीर सबसे आगे हैं। इन सभी राज्यों ने बीस से अधिक प्रस्ताव भेजे हैं। पूर्वोत्तर के राज्यों से पिछले हफ्ते ही पांच प्रस्ताव आए हैं।

फिजिबिलिटी रिपोर्ट के लिए कंसलटेशन टेंडर जारी

प्रस्ताव इतनी तेजी से आ रहे हैं कि फिजिबिलिटी रिपोर्ट के लिए कंसलटेशन के नए टेंडर जारी करने पड़े हैं और एक-एक कंसलटेशन फर्म को आठ से दस प्रस्तावों की रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। प्रकाश गौड़ ने बताया कि चार-पांच राज्यों को छोड़कर लगभग सभी राज्य अपने यहां रोपवे बनाना चाहते हैं। हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक ने भी दस से अधिक प्रस्ताव दिए हैं। इसी तरह मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश भी लगभग 15 रोपवे प्रोजेक्ट बनाना चाहते हैं।

परियोजना में कई बिंदुओं का रखा गया है ध्यान

गौड़ ने बताया कि हम इन प्रोजेक्ट के जरिये लाभ नहीं कमाना चाहते हैं। हमारा उद्देश्य यह है कि लागत निकल आए। हमें ध्यान रखना है कि रोपवे में शुल्क इतना अधिक न हो कि यह आम लोगों की पहुंच से बाहर हो। पर्वतमाला परियोजना के तहत राज्यों को रोपवे निर्माण के लिए दो तरह के प्रस्ताव दिए गए हैं। राज्य जमीन और सभी तरह की मंजूरियां उपलब्ध कराएं और प्रोजेक्ट की पूरी लागत केंद्र सरकार वहन करेगी और दूसरा विकल्प यह है कि वे परियोजना की लागत का एक हिस्सा वहन करें। रोपवे परियोजनाओं को पर्यावरण की मंजूरी से छूट प्रदान की गई है। राज्यों की ओर से जो प्रस्ताव भेजे गए हैं उनमें अमरनाथ गुफा, महाराष्ट्र में हरिहर फोर्ट, कर्नाटक नंदी हिल्स, अंजनाद्रि, कोडाछाद्री हिल्स, उत्तराखंड में औली, लद्दाख में लेह पैलेस, मथुरा, गाजियाबाद, विजयवाड़ा में कनकदुर्गम्मा मंदिर, तेलंगाना में ईगलपेंट से श्रीसैलम शामिल हैं।

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Edited By: Devshanker Chovdhary

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