शहडोल, राज्य ब्यूरो: देश के पहले सीडीएस स्व. बिपिन रावत के छोटे साले यशवर्धन सिंह अपने जीजाजी के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए दिल्ली में थे और इसी दौरान बिना उनकी सहमति के मध्य प्रदेश के शहडोल जिला प्रशासन ने उनकी निजी जमीन अधिग्रहित कर ली और बगैर मुआवजा दिए उस पर सड़क का निर्माण शुरू करा दिया। इंटरनेट मीडिया पर यशवर्धन सिंह के इस संबंध में पोस्ट करने के बाद हलचल मची। मंगलवार को कलेक्टर वंदना वैद्य ने मौके पर एडीएम सहित अन्य राजस्व अधिकारियों को भेजकर जांच कराई। जांच में सामने आया कि यशवर्धन की लगभग 12 डिसमिल जमीन पर बिना मुआवजा दिए सड़क निर्माण शुरू कर दिया गया है। कलेक्टर ने निर्माण कार्य पर रोक लगा दी है। उन्होंने कहा कि मैंने यशवर्धन सिंह से बात की है। जब वे दिल्ली से आएंगे तो उनकी बात सुनकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

काम पर लगाई गई रोक

कलेक्टर ने बताया कि शहडोल से लगे राजाबाग सोहागपुर के सामने नेशनल हाइवे 43 का निर्माण चल रहा है। सोहागपुर में 2015 से हाइवे बन रहा है, जिसके लिए जमीन का अधिग्रहण किया गया था। यशवर्धन सिंह को 2016 में 0.083 हेक्टेयर का दो करोड़ 14 लाख 77 हजार रपये मुआवजा मिल चुका है। हाइवे की बगल में उनकी 0.056 हेक्टेयर भूमि के भू-अर्जन की कार्रवाई के लिए भी नोटिफिकेशन हो चुका है। तहसीलदार, आरआइ को मौके पर भेजा था। समाधि स्थल हटाए गए हैं, सड़क पर मिट्टी बिछाई गई है, अभी पेड़ नहीं काटे गए हैं। मामला एसडीएम कोर्ट में पहुंच गया है। फिलहाल काम रोक दिया गया है।

गैर मौजूदगी का फायदा उठाने का आरोप

यशवर्धन सिंह का कहना है कि वह जीजाजी की अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए दिल्ली में थे, तभी ठेकेदार मनोज दीक्षित ने फोन कर कहा कि निर्माण कार्य शुरू कर रहे हैं, आप मौके पर आइए। उनके दिल्ली में होने का फायदा उठाकर उनके निज निवास परिसर से बिना भूमि अधिग्रहण किए समाधियों को नष्ट कर दिया गया और पेड़ों को काटकर नेशनल हाइवे का निर्माण किया जा रहा है। उनका यह भी कहना था कि प्रशासन ने हस्तक्षेप करने पर स्थानीय पुलिस को हमारे खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश जारी किया है। हालांकि, शहडोल एसपी अवधेश गोस्वामी ने बताया कि इस मामले में किसी पक्ष की कोई शिकायत नहीं है। कोई कार्रवाई भी प्रस्तावित नहीं है।

Edited By: Amit Singh