नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। एसआइटी की ओर से बंद किये गए 1984 के सिख विरोधी दंगों के 199 मामलों की समीक्षा अब सुप्रीम कोर्ट के दो सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे। समझा जाता है कि छह दिसंबर को अगली सुनवाई के बाद सिख विरोधी दंगों के कई मामले बंद करना सही था या नहीं तय होगा।

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने मामलों की समीक्षा के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश जेएम पंचाल और केएस राधाकृष्णन की दो सदस्यीय समिति गठित कर दी। ये समिति पांच सितंबर से अपना काम शुरू कर देगी और तीन महीने में सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट सौंप देगी। पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के ही सेवानिवृत्त जस्टिस जेएम पंचाल व जस्टिस केएस राधाकृष्णन की दो सदस्यीय कमेटी गठित करते हुए अपने आदेश में कहा कि ये समिति एसआइटी के बंद किये 199 मामलों की समीक्षा करेगी और ये बताएगी कि मामलों को बंद करने का एसआइटी का निर्णय सही था या नहीं।

पीठ ने कहा कि एएसजी तुषार मेहता ने बड़ी साफगोई से कहा है कि समिति एसआइटी की ओर से बंद किये गए 42 अन्य मामलों की भी समीक्षा करे। कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार कमेटी को सभी जरूरी सहयोग देगी। कमेटी 5 सितंबर से काम शुरू करेगी और तीन महीने मे कोर्ट को रिपोर्ट सौंपेगी। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए छह दिसंबर की तिथि तय करते हुए निर्देश दिया कि 199 मामलों का रिकार्ड जो कोर्ट में सीलबंद लिफाफे में दाखिल किया गया था, इसे समिति को भी मुहैया कराया जाएगा।

इस बात पर पिछली सुनवाई पर ही सहमति बन गई थी कि एसआइटी के बंद किये 199 मामलों की समीक्षा सुप्रीम कोर्ट के दो सेवानिवृत न्यायाधीशों से कराई जानी चाहिए। हालांकि उस समय तक नाम तय नहीं हुए थे। गत 2 अगस्त को केंद्र सरकार ने सिख दंगों के 199 मामलों की फाइल और रिकार्ड की फोटो कापी सीलबंद कवर में सुप्रीम कोर्ट को सौंपी थी। इससे पहले गत मार्च में सरकार ने कोर्ट के आदेश पर 1984 के दंगों की एसआइटी द्वारा की जा रही जांच की रिपोर्ट दाखिल की थी और उसमें केसों का ब्योरा दिया था।

दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के सदस्य गुरुदयाल सिंह कहलौं ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की है जिस पर यह सुनवाई चल रही है। याचिकाकर्ता गुरुदयाल सिंह कहलौं के वकील ने मार्च में हुई सुनवाई में कहा था कि 1984 के दंगों की जांच के लिए गठित केंद्र सरकार की एसआइटी ने कुल 293 मामलों की जांच परख की और उसमें से 199 को बंद करने का फैसला किया है। उधर, सरकार की ओर कहा गया था कि उच्च स्तरीय एसआइटी मामलों की जांच कर रही है। एसआइटी का कार्यकाल 11 अगस्त तक है। 199 मामलों की जांच बंद करने के बारे में कहा था कि ये केस 33 साल पुराने हैं। इन मामलों की जांच इसलिए बंद करनी पड़ी क्योंकि ये केस पता नहीं चल पाए। जबकि याचिकाकर्ता का कहना था कि 199 केसों को बंद करने का फैसला लेने के बारे में कोई पारदर्शिता नहीं है। 

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By Manish Negi