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'देश में आरक्षण बेहद जरूरी', रिजर्वेशन पर एबीवीपी ने साफ किया अपना रुख

Published: Thu, 24 Sep 2026 11:00 PM (IST)

एबीवीपी ने स्पष्ट किया है कि देश में आरक्षण व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है और इसे जारी रहना चाहिए ताकि समाज के सभी वर्ग एक साथ आगे बढ़ सकें।

आरक्षण व्यवस्था पर संघ के छात्र संगठन ABVP का रुख साफ

आरक्षण व्यवस्था पर संघ के छात्र संगठन ABVP का रुख साफ

HighLights

  1. आरक्षण व्यवस्था समाज के प्रत्येक वर्ग के लिए अत्यंत आवश्यक है।

  2. एनटीए में पूर्ण फेरबदल कर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो।

  3. 'कोचिंग माफिया' पर लगाम कसने हेतु कड़े नियम बनें।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने स्पष्ट किया है कि देश में आरक्षण व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है।

एबीवीपी के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने एक साक्षात्कार में कहा कि संगठन का मानना है कि समाज के प्रत्येक वर्ग को एक साथ मिलकर आगे बढ़ना चाहिए, जिसके लिए आरक्षण का बने रहना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान ने आरक्षण का प्रविधान किया है और यह जारी रहना चाहिए।

सोलंकी ने उन समूहों की मांगों पर टिप्पणी की जो मौजूदा आरक्षण नीति में सुधार या उसे समाप्त करने की वकालत करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी मांग करने वाले लोगों को इस विषय को गहराई से समझने की आवश्यकता है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संगठन की विचारधारा सामाजिक समरसता पर आधारित है, इसलिए देश की वास्तविक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आरक्षण का समर्थन किया जाना चाहिए।

परीक्षाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एबीवीपी ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) में पूर्ण फेरबदल की मांग की है। सोलंकी ने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने और परीक्षा प्रक्रिया को फूलप्रूफ बनाने के लिए एनटीए में स्थायी कर्मचारियों की नियुक्ति होनी चाहिए।

उन्होंने परीक्षा प्रक्रिया में आउटसोर्सिंग को कम करने, पेपर-सेटिंग प्रणाली को मजबूत करने तथा परीक्षा की घोषणा से लेकर परिणाम आने तक हर स्तर पर जवाबदेही तय करने पर जोर दिया।

छात्र संगठन ने 'कोचिंग माफिया' पर लगाम कसने के लिए कड़े नियमों की मांग की है, जिसमें संस्थानों की फीस और छात्रों की संख्या पर सीमा (कैप) तय करना शामिल है।

सोलंकी ने कहा कि चूंकि स्कूल-कालेज प्रतियोगी परीक्षाओं की मांग के अनुरूप तैयारी प्रदान नहीं करते, इसलिए एक समानांतर कोचिंग उद्योग खड़ा हो गया है। इसे रातों-रात समाप्त नहीं किया जा सकता, लेकिन मौजूदा कानूनों को सख्ती से लागू करके विनियमित जरूर किया जा सकता है।

सोलंकी ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी (जेन-अल्फा) पुरानी पीढ़ियों की तुलना में अधिक समझदार है। यह पीढ़ी इंटरनेट मीडिया के दौर में अधिक जागरूक है, इसलिए उनका राजनीतिकरण करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

इसके बजाय, उन्हें देश के विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि शैक्षणिक संस्थानों को राजनीति का अखाड़ा नहीं बनाया जाना चाहिए।

(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)