CJI सूर्यकांत के खिलाफ पोस्ट और प्रदर्शन पर अवमानना कार्यवाही का अनुरोध, SC की सुरक्षा पर विचार का आग्रह
एक वकील ने कांग्रेस की केरल इकाई की अब हटाई जा चुकी सोशल मीडिया पोस्ट और विपक्ष के सुप्रीम कोर्ट ...और पढ़ें

CJI सूर्यकांत के खिलाफ पोस्ट और प्रदर्शन पर अवमानना कार्यवाही का अनुरोध
HighLights
वकील ने कांग्रेस केरल की पोस्ट पर अवमानना कार्यवाही मांगी।
CJI सूर्यकांत से सुप्रीम कोर्ट की सुरक्षा पर विचार का आग्रह।
महिला पत्रकारों पर मारपीट, जंतर-मंतर पाबंदियों पर भी सुनवाई।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के एक वकील ने भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत से कांग्रेस की केरलम इकाई की अब हटाई जा चुकी सोशल मीडिया पोस्ट और विपक्ष के सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए मार्च के संबंध में स्वतः संज्ञान लेकर आपराधिक अवमानना की कार्यवाही पर विचार करने का अनुरोध किया।
अपनी शिकायत में अधिवक्ता विनीत जिंदल ने CJI से यह जांचने का आग्रह किया कि क्या पोस्ट और सुप्रीम कोर्ट परिसर में प्रदर्शन और नारेबाजी ऐसे मुद्दे हैं जिन पर कानूनन कार्रवाई की जरूरत है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की सुरक्षा और कामकाज से जुड़ी चिंताओं का भी उल्लेख किया।
कांग्रेस की केरलम इकाई ने एक्स पर पोस्ट किया था, ‘प्रिय सूर्यकांत, अगर कानून-व्यवस्था आपके अधिकार क्षेत्र में नहीं है, तो अभी इस्तीफा दे दीजिए। हम आपका ऐसा उत्तराधिकारी ढूंढ लेंगे, जो इसे संभाल सके।’
जिंदल ने कहा कि यह तय करने के लिए पोस्ट की पूरी तथ्यात्मक और कानूनी पृष्ठभूमि की जांच की जानी चाहिए कि वह स्वीकार्य राजनीतिक आलोचना की सीमा में आती है या उस पर अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 2(सी) के तहत विचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 129 का हवाला दिया, जो सुप्रीम कोर्ट को अपनी अवमानना के लिए दंडित करने का अधिकार देता है। जिंदल ने आग्रह किया कि स्वतः संज्ञान से कार्यवाही पर विचार किया जाए। वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने शीर्ष अदालत में इस मामले का उल्लेख किया, तो CJI ने पूछा,“क्या यह उल्लेख सूची में है?” भाटिया ने नकारात्मक जवाब दिया, तो CJI ने कहा,“कल इसका उल्लेख कीजिए।”
महिला पत्रकारों से मारपीट पर दिल्ली पुलिस तलब
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में प्रदर्शनों की कवरेज कर रही महिला पत्रकारों से पुलिसकर्मियों ने मारपीट की। अदालत ने दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी को निर्देश दिया कि वह मामले में स्पष्टीकरण देने के लिए गुरुवार को सुनवाई में मौजूद रहें।
भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह द्वारा नेटवर्क ऑफ विमेन इन मीडिया, इंडिया की याचिका का उल्लेख किए जाने के बाद यह टिप्पणी की।
याचिका में प्रदर्शनों की कवरेज करने वाले पत्रकारों, खासकर महिला पत्रकारों की सुरक्षा के उपाय करने की मांग की गई है। पीठ ने कहा, “हम चाहते हैं कि कोई वरिष्ठ अधिकारी यहां मौजूद रहे और मामले में स्पष्टीकरण दे।” पीठ ने संकेत दिया कि पुलिस को आरोपों पर जवाब देना होगा।
जंतर-मंतर में प्रदर्शनों पर रोक को सुप्रीम चुनौती
सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों पर लगाई गई पाबंदियों और सार्वजनिक प्रदर्शनों के लिए वैकल्पिक स्थलों को निर्धारित किए जाने को चुनौती दी गई है।
दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार के 11 अक्टूबर के स्थायी आदेश में जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित सूची से हटा दिया गया और पूर्वी दिल्ली में रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान तथा सीबीडी मैदान को प्रदर्शनों के लिए नए स्थल घोषित किया गया।
याचिका में राष्ट्रीय राजधानी में निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की उपलब्धता और उपयुक्तता को लेकर चिंता जताई गई है। याचिका में पाबंदियों के पीछे के तर्क और प्रदर्शनों के लिए अन्य स्थानों के चयन पर सवाल उठाए गए हैं।
(समाचार एजेंसी आईएएनएस के इनपुट के साथ)
