दक्षिणी दिल्ली, जासं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने बीटेक कर रहे सैकड़ों छात्रों को राहत देते हुए वर्ष 2013-14 के अकादमिक वर्ष में दाखिला पाने वाले विद्यार्थियों के लिए चार वर्षीय बीटेक कार्यक्रम जारी रखने को कहा है। यूजीसी का आदेश ऐसे समय में आया जब रविवार को डीयू के बीटेक और बीएमएस के सैकड़ों विद्यार्थियों ने चार वर्षीय पाठयक्रम निरस्त नहीं किए जाने की मांग करते हुए मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी के निवास के बाहर प्रदर्शन किया। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने चार वर्षीय स्नातक पाठयक्रम वापस लिए जाने के बाद बीटेक छात्रों को काफी राहत मिली है।

बैचलर इन मैनेजमेंट स्टडीज [बीएमएस] के बारे में चर्चा करने के लिए कल स्थायी सलाहकार समिति की बैठक बुलायी गयी है। डीयू के एक अधिकारी के अनुसार पिछले साल करीब 6500 विद्यार्थियों को 35 कालेजों में छह बीटेक कार्यक्रमों - कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रोनिक्स, फूड टेक्नॉलोजी, पोलीमर साइंस, इंस्ट्रूमेंटेशन एंड इलेक्ट्रोनिक्स तथा साइकोलाजिक साइंस में दाखिला मिला था। करीब 840 बीएमएस कर रहे हैं। वे एफवाईयूपी वापस लिए जाने के बाद प्रदर्शन कर रहे हैं।

विश्व विद्यालय अनुदान आयोग ने डीयू से यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि उसके अंतर्गत आने वाले कॉलेज, जिन्होंने छात्रों को एफवाईयूपी के तहत विद्यार्थियों को दाखिला दिया, स्वयं यूजीसी तथा एआईसीटीई जैसे नियामक निकायों से मंजूरी लें ताकि एफवाईयूपी वाले विद्यार्थी किसी नुकसान की स्थिति में नहीं रहें।

यूजीसी ने रविवार को जारी एक बयान में कहा कि कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रोनिक्स, फूड टेक्नॉलोजी, पोलीमर साइंस, इंस्ट्रूमेंटेंशन एंड इलेक्ट्रोनिक्स के चार वर्षीय बीटेक कार्यक्रम [जिनमें दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों में ऐसे छात्रों को दाखिला दिया गया है] और जो [बीटेक के सिलसिले] यूजीसी अधिनियम की धारा 22 के तहत आते हैं, केवल 2013-14 के दौरान दाखिला पाने वाले के लिए जारी रह सकते हैं।

अधिकारियों के अनुसार आयोग साइकोलाजिक साइंस कोर्स के बारे में मौन है। इसे और बैचलर मैनेजमेंट स्टडीज [बीएमएस] तीन वर्षीय पाठ्यक्रम के रूप में तब्दील किए जा सकते है। समिति ने 23 जून को एफवाईयूपी से तीन वर्षीय पाठ्यक्त्रम में बदलाव के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर चर्चा की थी।

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