नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। प्राथमिक उपचार की महत्ता सिर्फ इतने से समझी जा सकती है कि हर वर्ष दुनिया में तकरीबन 13.4 लाख लोग सड़क दुर्घटनाओं में समय पर प्राथमिक उपचार न मिल पाने की वजह से अपनी जिंदगी गवां देते हैं। ऐसे ही तमाम तरह के स्वास्थ्य से जुड़ी आपात स्थितियों में हम बड़ी संख्या में महज समय से प्राथमिक उपचार न मिल पाने से अनमोल मानव संसाधन खो रहे हैं। लोगों के बीच प्राथमिक उपचार का महत्व समझाने और जागरुकता लाने के लिए हर वर्ष सितंबर के दूसरे शनिवार को विश्व प्राथमिक चिकित्सा दिवस मनाया जाता है। इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेडक्रास क्रिसेंट सोसायटीज ने 2000 में इसकी शुरुआत की। इसकी थीम सड़क दुर्घटना में पहला कदम है।

ऑक्सीजन के अभाव में मौतें

दुनिया में होने वाली मौतों में सड़क दुर्घटना नौवां प्रमुख कारण है। हर वर्ष 13.4 लाख लोग दुनिया की सड़क दुर्घटनाओं में प्राथमिक उपचार के अभाव में मारे जाते हैं। इनमें ज्यादातर मौतें ऑक्सीजन न मिल पाने की वजह से होती हैं।

जागरूक नहीं हैं लोग

किसी भी मेडिकल आपात स्थिति में लोग पीड़ित को सीधे अस्पताल लेकर भागते हैं। कई मामलों में तब तक बहुत देर हो जाती है। मौके पर ही प्राथमिक चिकित्सा से ऐसी जिंदगियां बचाई जा सकती है। भारत सहित तमाम देशों में इसको लेकर लोग जागरूक ही नहीं हैं।

प्रशिक्षण की जरूरत नहीं

घर और गाड़ी में अपने साथ हमेशा प्राथमिक उपचार किट रखें। डूबने, जलने, हृदयघात, सड़क दुर्घटना और आत्मघात में प्राथमिक उपचार से जान बचाई जा सकती है। घायल इंसान को तुरंत उपचार मिलना चाहिए। प्राथमिक उपचार कोई भी कर सकता है इसके लिए प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं।

पानी में डूबने पर क्या करें

- पीड़ित को पानी से बाहर निकालें। कंबल से ढक दें।

- सुनिश्चित करें कि उसमें हाइपोथर्मिया के लक्षण तो नहीं दिख रहे हैं।

- यदि पीड़ित सांस नहीं ले रहा है तो तुरंत सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिस्साइटेशन) दें। इस तकनीक में व्यक्ति के सीने पर दबाव डालकर उसकी सांस लौटाई जाती है।

आग से जलने पर क्या करें

- जले स्थान पर पांच मिनट तक ठंडा पानी डालें। रगड़ें नहीं।

- हल्के कसाव से पट्टी बांध दें, जिससे वहां संक्रमण न हो सके।

सड़क दुर्घटना में प्राथमिक उपचार

- बेहोश इंसान को तरल न पिलाएं। यह श्वांस नली में जाकर दम घोंट सकता है।

- बेहोश व्यक्ति को चपत लगाकर या हिलाकर होश में लाने की कोशिश न करें।

- खून बहने से रोकें।

- गर्दन या रीढ़ में चोट लगे व्यक्ति को इधर से उधर खिसकाया न जाये।

- सुनिश्चित करें कि घायल की जीभ उसकी श्वांस नली को ब्लॉक न करे।

- घायल का सांस लेते रहना जरूरी है। यदि सांस बंद हो तो कृत्रिम सांस देने का उपाय करें।

- इस दौरान एंबुलेंस या किसी अन्य वाहन से घायल को अस्पताल ले जाएं।

- घायल के पास मोबाइल और पहचान संबंधी दस्तावेज देखें ताकि उसके परिजनों से संपर्क किया जा सके। 

Posted By: Sanjay Pokhriyal