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प्रदर्शन में असामाजिक तत्वों की घुसपैठ, स्थिति बिगड़ने की ग्राउंड रिपोर्ट; धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की ये है असली वजह

Published: Sat, 25 Jul 2026 09:56 PM (IST)Updated: Sat, 25 Jul 2026 11:27 PM (IST)

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नीट पेपर लीक विवाद के बाद इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद सरकार ने प्रदर्शनकारियों की ...और पढ़ें

धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफे की असली वजह। (पीटीआई)

धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफे की असली वजह। (पीटीआई)

HighLights

  1. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नीट विवाद पर इस्तीफा दिया।

  2. सरकार ने प्रदर्शनकारियों की सभी प्रमुख मांगें स्वीकार कीं।

  3. जंतर मंतर पर 36 दिन का छात्र आंदोलन समाप्त हुआ।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। नीट पेपर लीक से उठे विवाद में आखिकार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। सरकार ने इस्तीफे के साथ साथ आंदोलनकारियों पर हुए सभी केस वापस करने और नीट के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग भी मान ली। इसके साथ ही जंतर मंतर पर सीजेपी का छात्र आंदोलन भी खत्म हो गया।

स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और पीएमओ में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह के साथ बातचीत और सरकार की ओर से सभी मांगे जाने के बाद काकरोच जनता पार्टी के प्रतिनिधि आशुतोष रांका ने जंतर-मंतर पर 36 दिन से चल रहे आंदोलन को तत्काल खत्म करने का ऐलान किया और सभी प्रदर्शनकारियों को वापस अपने घर लौटने की अपील की।

जनभावनाओं को देखते हुए इस्तीफे का फैसला

जनभावनाओं को देखते हुए और सुरक्षा को लेकर ग्राउंट रिपोर्ट मिलने के बाद प्रधान का इस्तीफा लेने का फैसला लिया गया। इस्तीफा देते हुए प्रधान ने "भारत की युवा शक्ति" को "देश की असली ताकत" बताते हुए कहा कि "यह मेरे लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है" और "पहले ही दिन से इस पर मैंने अपनी जिम्मेदारी ली" है।

सूत्रों के अनुसार शनिवार की सुबह उन्हें बताया गया कि आज की स्थिति में इस्तीफा जरूरत है और प्रधान ने सीजेपी के साथ सरकार की वार्ता से पहले दोपहर ढ़ाई बजे पोस्ट के जरिए अपने इस्तीफे की घोषणा कर दी।

दरअसल सोमवार को प्रदर्शनकारियों के "संसद मार्च" के दौरान हुई हिंसक झड़पों के बाद से ही सरकार इस आंदोलन को खत्म करने को लेकर गंभीरता से सोचना शुरू कर दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के साथ ही अमित शाह के साथ कई दौर की बैठकों में इस पर गहन विचार विमर्श किया गया।

पीएम मोदी ने संभाला मोर्चा

जनभावनाओं के साथ ग्राऊंड से आ रही रिपोर्ट को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने खुद मोर्चा संभाला। इसके बाद ही स्थिति बिगड़ने से पहले ही आंदोलन को खत्म कराने का फैसला लिया गया।

सोनम वांगचुक के अनशन तोड़ने के बाद सरकार को आंदोलन के खत्म होने का रास्ता दिखा। लेकिन जंतर-मंतर पर हजारों प्रदर्शनकारियों की मौजूदगी और कॉकरोच जनता पार्टी के धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की शर्त पर अड़ने के बाद सरकार के पास विकल्प नहीं बचा था।

प्रदर्शनकारियों में असामाजिक तत्वों की घुसपैठ और बीच-बीच में पुलिस व मीडिया कर्मियों पर हमलों को देखते हुए कभी भी स्थिति बिगड़ने की ग्राउंड रिपोर्ट भी मिल रही थी। जनभावनाओं को देखते हुए आखिरकार धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफे के लिए कह दिया गया।

धर्मेंद्र प्रधान ने बताई इस्तीफे की वजह

युवाओं के नाम जारी संदेश में धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफे की विस्तार से अपने इस्तीफे की वजह बताई।

प्रधान ने कहा कि "जंतर-मंतर पर और देश में जो स्थिति बनी है, इस स्थिति का राष्ट्र विरोधी ताकतें लाभ ना उठाएं, देश की एकता बनी रहे, भारत के एक भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी पेंचीदगियों में ना उलझे, हमारे बच्चे अपने समय पढ़ाई में लगाएं, करियर बनाने पर फोकस करें, इसी बात पर विचार करते हुए " अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री को भेज दिया है।

उन्होंने कहा कि जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्तियों द्वारा छात्रों को गुमराह करने के लिए बाधा डालने की कोशिशों लेकर भी व्यथित हैं।

सरकार सीजेपी की दो मांगो को शुक्रवार को ही मान चुकी थी। शनिवार को इस्तीफे की घोषणा पहले ही हो चुकी थी। फिर भी दोपहर साढ़े तीन बजे फिर से वार्ता हुई और उसके बाद संयुक्त प्रेसवार्ता में जहां सरकार की ओर से जेपी नड्डा ने सभी मांगो पर सरकार की मंजूरी दी वहीं सीजेपी ने वहीं से आंदोलन खत्म करने और सभी आंदोलनकारियों के वापस घर जाने की अपील की।

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