नई दिल्ली, जेएनएन। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपना 96वां स्थापना दिवस शुक्रवार यानी विजयदशमी के दिन मना रहा है। वर्ष 1925 में विजयदशमी के दिन ही नागपुर के मोहितेवाड़ा नामक स्थान पर डा. केशव बलिराम हेडगेवार ने संघ की स्थापना की थी। वैसे तो नवरात्र प्रारंभ होने के दिन से ही संघ के स्वयंसेवक स्थापना दिवस समारोह को शाखाओं पर मनाने लगते हैं, लेकिन विजयदशमी के दिन नागपुर में आयोजित समारोह में सरसंघचालक उपस्थित रहते हैं और स्वयंसेवकों को संबोधित करते हैं। इस मौके पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि हम ऐसी संस्कृति नहीं चाहते हैं जो विभाजन को लंबा करे, बल्कि वह संस्कृति चाहते हैं जो राष्ट्र को एक साथ बांधे और प्रेम को बढ़ावा दे। इसलिए, जयंती, त्योहार जैसे विशेष अवसर एक साथ मनाए जाने चाहिए।

उन्होंने कहा कि विभाजन का दर्द अब तक नहीं गया है। जिस दिन हम स्वतंत्र हुए उस दिन स्वतंत्रता के आनंद के साथ हमने एक अत्यंत दुर्धर वेदना भी अपने मन में अनुभव की वो दर्द अभी तक गया नहीं है। देश का विभाजन हुआ, वो अत्यंत दुखद इतिहास है, लेकिन उस इतिहास को सत्य का सामना करना चाहिए, उसे जानना चाहिए।

उन्होंने कहा कि मंदिर, पानी, शमशान एक हों। भाषा ऐसी होनी चाहिए जिससे समाज जुड़े। समाज में भेद पैदा करने वाली भाषा नहीं होनी चाहिए। नई पीढ़ी को देश के इतिहास के बारे में जानना चाहिए। स्वतंत्रता के साथ हमें विभाजन का दर्द भी मिला।

उन्होंने कहा कि जिस शत्रुता और अलगाव के कारण विभाजन हुआ उसकी पुनरावृत्ति नहीं करनी है। पुनरावृत्ति टालने के लिए, खोई हुई हमारे अखंडता और एकात्मता को वापस लाने के लिए उस इतिहास को सबको जानना चाहिए। खासकर नई पीढ़ी को जानना चाहिए। खोया हुआ वापस आ सके खोए हुए बिछड़े हुए वापस गले लगा सकें।

उन्होंने आगे कहा कि जनसंख्या नीति पर फिर से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि गति से बढने वाली जनसंख्या निकट भविष्य में कई समस्याओं को जन्म दे सकती है, इसलिए उसपर ठीक से विचार किया जाना चाहिए।

Edited By: Neel Rajput