चेन्नई, आइएएनएस। चेन्नई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) को एक लाख करोड़ रुपये के आइएलएफएस घोटाले के मुख्य सरगना को गिरफ्तार करने में सफलता मिली है। पुलिस के हत्थे चढ़ा रवि पार्थसारथी आइएलएफएस समूह का पूर्व चेयरमैन और प्रबंध निदेशक है। इन्फ्रास्ट्रक्चर लिजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज (आइएलएफएस) घोटाले के सामने आने से साल 2018 में फाइनेंशियल सर्विस मार्केट में तरलता का संकट पैदा हो गया था।

15 दिन की पुलिस रिमांड

ईओडब्ल्यू के डीएसपी प्रकाश बाबू ने पार्थसारथी की गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए कहा कि अदालत ने उसे 15 दिन की पुलिस रिमांड में भेज दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि उसकी जमानत याचिका पर सोमवार को सुनवाई होगी। वहीं, चेन्नई पुलिस के ईओडब्ल्यू ने एक बयान में कहा कि एक लाख करोड़ रुपये के आइएलएफएस घोटाले के किंगपिन, मास्टरमाइंड और मुख्य कर्ताधर्ता पार्थसारथी को 20 सितंबर, 2020 को दर्ज अपराध संख्या 13 के संबंध में गिरफ्तार किया गया है।

समूह में 350 से ज्यादा कंपनियां

ईओडब्ल्यू ने आगे कहा कि आइएलएफएस समूह में 350 से ज्यादा कंपनियां हैं। इस समूह के तत्कालीन चेयरमैन, प्रबंध निदेशक और सीईओ रवि पार्थसारथी ने इन कंपनियों के माध्यम से इस घोटाले को अंजाम दिया। इस घोटाले के चलते 200 करोड़ रुपये गंवाने वाली कंपनी 63 मून टेक्नोलाजी लिमिटेड की शिकायत पर इस मामले में एफआइआर की गई थी। बाद में और भी कई लोगों ने इसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थीं।

चिदंबरम का बेहद करीबी है पार्थसारथी

आइएलएफएस घोटाले का मुख्य मास्टरमाइंड रवि पार्थसारथी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और देश के पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम का बेहद करीबी बताया जाता है। उसके खिलाफ कंपनी, उसके शेयरधारकों और कर्जदाताओं के हितों के खिलाफ काम करने का आरोप है।

नहीं मिली थी अग्रिम जमानत

पार्थसारथी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत लेने की कोशिश की थी, लेकिन मद्रास हाई कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी थी। ईओडब्ल्यू ने कहा कि अन्य पीडि़त जमाकर्ता और निवेशक उसके यहां अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

2018 में सामने आया था घोटाला

पार्थसारथी के कार्यकाल के दौरान ही जुलाई-सितंबर, 2018 तिमाही के दौरान आइएलएफएस में पहली बार गड़बड़ी सामने आई थी। इसकी दो सहायक कंपनियां कर्ज का भुगतान करने में असमर्थ रही थीं। बाद में इस समूह की अन्य कंपनियों और वित्तीय सेवाएं देने वाली संस्थाओं में तरह के मामले आने शुरू हो गए।

हलचल थामने को केंद्र ने दिया दखल

इस घोटाले के सामने आने के बाद फाइनेंशियल बाजार में मची हलचल को थामने के लिए केंद्र सरकार ने इस कंपनी को अपने नियंत्रण में लेने की पहल की। नेशनल कंपनी ला ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) एक निर्देश के बाद कंपनी के कामकाज को देखने के लिए उदय कोटक के नेतृत्व में एक बोर्ड का गठन किया गया। एनसीएलटी में केंद्र सरकार ने पार्थसारथी और उसकी टीम को गड़बड़ी के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार ठहराया था। पार्थसारथी 25 साल से आइएलएफएस समूह के सर्वेसर्वा बना हुआ था।

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