मुंबई, एजेंसी। उद्योगपति रतन टाटा (Ratan Tata) ने देश के करोड़ों बुजुर्गों के खालीपन को भरने के लिए बड़ा कदम उठाया है। रतन टाटा ने एक ऐसे छोटे से स्‍टार्टअप में निवेश किया है, जो अकेलेपन का दर्द झेल रहे बुजुर्गों की मदद करता है। रतन टाटा ने मंगलवार को स्टार्टअप गुडफेलोज (Goodfellows) में निवेश की घोषणा की है, जो वरिष्ठ नागरिकों को सेवा के रूप में सहयोग प्रदान करेगा। यह जानकारी समाचार एजेंसी पीटीआई ने दी।

मालूम हो कि 80 वर्षीय उद्योगपति रतन टाटा स्टार्टअप्स के सक्रिय समर्थक रहे हैं। अब तक 50 से अधिक कंपनियों में वह निवेश कर चुके हैं। इस नई स्टार्टअप कंपनी गुडफेलोज की स्थापना शांतनु नायडू (Shantanu Naidu) ने की है। तीस वर्षीय नायडू कॉर्नेल विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र हैं। वह टाटा की एक कंपनी में जनरल मैनेजर हैं।

नायूड ने कहा कि वे इसकी सेवाएं पूरे देश में शुरू करना चाहते हैं, लेकिन इसकी गुणवत्‍ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्‍होंने रतन टाटा को बॉस, मार्गदर्शक और एक सच्चा दोस्‍त बताया है। उन्‍होंने कहा कि इस स्‍टार्टअप का आइडिया भी रतन टाटा को देखकर ही आया जो उनसे करीब पांच दशक से ज्‍यादा बड़े हैं। उन्होंने कहा कि यह स्टार्टअप वरिष्ठ नागरिक ग्राहकों के साथी के रूप में ‘काम’ करने के लिए युवा स्नातकों को काम पर रखता है।

मुंबई के अलावा और भी शहरों में कंपनी खोले जाने की है योजना

आम तौर पर एक साथी सप्ताह में तीन बार ग्राहक से मिलने जाता है और चार घंटों तक रहता है। एक महीने की मुफ्त सेवा के बाद कंपनी एक महीने का 5,000 रुपये का मासिक शुल्क लेती है। कंपनी मुंबई में बीटा फेज में पिछले छह महीनों से 20 बुजुर्गों के साथ काम कर रही है और आगे पुणे, चेन्नई और बेंगलुरु में सेवाएं देने की योजना बना रही है। नायडू ने कहा कि अभी डेढ़ करोड़ (15 मिलियन) बुजुर्ग हैं, जो उनके नवीनतम उद्यम के अवसर का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसके साथ ही नायडू ने रतन टाटा को सहज निवेशक बताया है।

Edited By: Dhyanendra Singh Chauhan