नई दिल्ली, एएनआइ। कोविड-19 के बढ़ते मामलों के साथ ही इसके लिए भी कई तरह के टेस्ट किए जा रहे हैं जैसे आरटी- पीसीआर, रैपिड एंटीजन टेस्ट और ट्रू नेट टेस्ट आदि। देश भर में प्रतिदिन होने वाले कोविड-19 (COVID-19) टेस्ट में करीब 25-30 फीसद रैपिड एंटीजन टेस्ट होते हैं। यह जानकारी स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से मंगलवार को दी गई है।

अब तक भारतीय मेडिकल अनुसंधान परिषद (ICMR) दो करोड़ से अधिक टेस्ट रिपोर्ट कर चुका है जिसमें से 26.5 लाख एंटीजन टेस्ट हैं। अंतिम 24 घंटों में ICMR ने 6 लाख 61 हजार 8 सौ 92 कोविड-19 टेस्ट किए। अभी तक किए गए 2 करोड़ से अधिक टेस्ट के साथ ICMR प्रति 10 लाख 15 हजार 1 सौ 19 टेस्ट कर रहा है।

आरटी- पीसीआर टेस्ट- संक्रमण की जांच के इस तरीके में नॉवेल कोरोना वायरस के आरएनए की जांच की जाती है। आरएनए वायरस का जेनेटिक मैटीरियल है। इस जांच के लिए नाक एवं गले के तालू से स्वैब लिया जाता है जिसकी जांच होती है। इसका रिपोर्ट आने में 12-16 घंटे का समय लग जाता है। घातक वायरस में पाए जाने वाले एंटीजन का पता चलता है।

रैपिड एंटीजन टेस्ट (रैट)-इस जांच के अंतर्गत नाक से स्वैब लिया जाता है। इसके जरिए वायरस में मौजूद एंटीजन की पहचान की जाती है और 20 मिनट के भीतर रिजल्ट आ जाता है। इसकी विश्वसनीयता की बात करें तो यदि रिजल्ट में पॉजिटिव आया है तो यह करीब 100 फीसद सही है। हालांकि 30-40 फीसद मामलों में यह निगेटिव रह सकता है। उस स्थिति में आरटी-पीसीआर टेस्ट किया जा सकता है। यह शरीर में पूर्व में हुए कोरोना वायरस के संक्रमण की जांच के लिए किया जाने वाला टेस्ट है। संक्रमित व्यक्ति का शरीर लगभग एक सप्ताह बाद लड़ने के लिए एंटीबॉडी बनाता है। 9वें दिन से 14वें दिन तक एंटीबॉडी बन जाती है।

ट्रू नेट टेस्ट- इसके तहत नाक या गले से स्वैब लिया जाता है। ट्रू नेट मशीन के द्वारा न्यूक्लिक एम्प्लीफाइड टेस्ट किया जाता है। अभी इस मशीन से टीबी व एचआईवी संक्रमण की जांच की जाती है। अब कोरोना का स्क्रीन टेस्ट किया जा रहा है। इसमें वायरस के न्यूक्लियिक मटीरियल को ब्रेक कर डीएनए और आरएनए जांचा जाता है। इसका रिजल्ट 3 घंटे में आ जाता है।

एंटीबॉडी टेस्ट- खून के सैंपल से किए गए इस टेस्ट के जरिए शरीर में पहले हुए कोविड-19 संक्रमण की जांच के लिए किया जाने वाला टेस्ट है। इस टेस्ट में रिजल्ट आने में एक घंटे का समय लगता है। संक्रमित व्यक्ति का शरीर लगभग एक सप्ताह बाद लड़ने के लिए एंटीबॉडी बनाता है। 9वें दिन से 14वें दिन तक एंटीबॉडी बन जाती है।

बता दें कि इस टेस्ट में वायरस की मौजूदगी का सीधा पता नहीं चलता। केवल एंटीबॉडी की उपस्थिति की जानकारी मिलती है। इससे यह पता चलता है कि व्यक्ति को कभी इंफेक्शन हो चुका है। संक्रमण बहुत हल्का होने पर कभी-कभी एंटीबॉडी टेस्ट में नहीं पाई जाएगी।

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