कोरबा, जेएनएन। बचपन बेहद मासूम होता है। यह न ही धार्मिक मान्यताओं को समझता और न ही मजहबी दूरियों को मानता। वह अपने हर खेल में बस अपने बचपन को ही जिंदा रखता है। ठीक ऐसी ही कहानी मासूम रमजान और मुबारक की भी है।

शहर में रहने वाले एक 10 साल के बच्चे रमजान का कहना है कि उसे सपने में गणेश जी नजर आते थे। उसने यह बात अपने दोस्त मुबारक को बताई और इसके बाद दोनों ने मिलकर गणेश बिठाने की ठान ली थी। लिहाज दो दिन पहले दोनों घर मे किसी को कुछ बताए बिना निकल गए और शहर की शारदा विहार कॉलोनी पहुंचे।

लोगों की मदद से बनाया गणेश जी का पंडाल
यहां आस-पास के घरों से थोड़ा चंदा जुटाया और रेलवे फाटक से थोड़ी ही दूर पर बने फुटपाथ पर एक झोपड़ीनुमा पंडाल तैयार कर गणेश जी की मूर्ति स्थापित की। पूजन की सामग्री भी खरीद लाए। मोहल्ले के लोग अब हर दिन गणेश जी की पूजा अर्चना करने आने लगे।

वहीं, रमजान और मुबारक को पास के लोग दो वक्त का खाना भी मुहैया कराते हैं। दोनों बच्चे पंडाल के भीतर ही सोते और मूर्ति की देखरेख करते हैं। 

परिजनों में बच्चों के गुम होने की चिंता
इधर मोहल्ले से दो बच्चों के एक साथ गायब होने से उनके परिजनों के हाथ पांव फूल गए। रमजान की मां के मुताबिक उसके पिता ने रमजान को किसी बात के लिए फटकार भी लगाई थी। जिसके बाद वह और मुबारक कहीं चले गए थे।

कल इसकी जानकारी किसी ने चाइल्डलाइन को दे दी और फिर उनके सदस्य बधों को ढूंढते इस पंडाल पर पहुंचे। रमजान और मुबारक दोनों को उनके परिजनों के हवाले कर दिया गया है, जबकि अब पंडाल की देखरेख शारदा विहार फाटक के पास के लोग कर रहे हैं।   

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Posted By: Dhyanendra Singh

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