नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। लाखों हिन्दुओं की आस्था से जुड़े राम सेतु को फिलहाल कोई खतरा नहीं है। समुद्र में जहाजों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए प्रस्तावित सेतु समुद्रम परियोजना के लिए राम सेतु को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। परियोजना के लिए सरकार कोई दूसरा वैकल्पिक मार्ग तलाशेगी। शुक्रवार को केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर सेतु समुद्रम परियोजना और राम सेतु के बारे में रुख स्पष्ट करते हुए ये बात कही है।

ज्ञात हो कि सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकायें लंबित हैं, जिसमें सेतुसमुद्रम परियोजना के वर्तमान मार्ग को रामसेतु को तोड़े जाने और पर्यावरण को नुकसान होने के आधार पर चुनौती दी गई है। इनमें से एक याचिका भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की है जिसमें विशेषतौर पर परियोजना को रामसेतु तोड़े जाने के आधार पर चुनौती दी गई है। स्वामी ने अपनी याचिका में कहा है कि राम सेतु लाखों हिन्दुओं की आस्था से जुड़ा है। इसे न तोड़ा जाए और राम सेतु को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाए। सेतु समुद्रम परियोजना को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने बहुत पहले बहस सुनकर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

फैसला सुरक्षित रखते समय कोर्ट ने सरकार से वैकल्पिक मार्ग तलाशने पर विचार करने को कहा था। इसके बाद सरकार ने पचौरी समिति का गठन किया था। समिति ने यूपीए सरकार के कार्यकाल में ही अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी। लेकिन यूपीए सरकार लगातार सेतु समुद्रम की प्रस्तावित परियोजना मौजूदा तय मार्ग से ही निकालना चाहती थी। केन्द्र में सत्ता परिवर्तन के बाद आयी भाजपा की अगुवाई वाली एनडीए सरकार ने शुरू में ही साफ कर दिया था कि लोगों की आस्था का ध्यान रखते हुए परियोजना के लिए राम सेतु नहीं तोड़ा जाएगा। लेकिन शुक्रवार को पहली बार सरकार ने खुल कर लिखित तौर पर सुप्रीम कोर्ट में इस बारे में अपना रुख साफ किया है।

केन्द्र सरकार के जहाजरानी मंत्रालय के निदेशक अनंत किशोर सरन की ओर से कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि परियोजना के सामाजिक और आर्थिक पहलुओं को देखने के बाद सरकार सेतु समुद्रम परियोजना के वर्तमान मार्ग (एलाइनमेंट 6) को नहीं लागू करना चाहती है। सरकार राष्ट्रहित में राम सेतु को नुकसान पहुंचाए बगैर परियोजना के लिए कोई दूसरा वैकल्पिक मार्ग तलाशेगी। सरकार ने कोर्ट से कहा है कि वह याचिका का उचित निपटारा कर सकता है। शुक्रवार को जहाजरानी मंत्रालय की ओर से पेश एएसजी पिंकी आनंद ने मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष सरकार के रुख और हलफनामे की जानकारी देते हुए कहा कि कोर्ट मामले का निपटारा कर सकता है।

वर्ष 2008 में तत्कालीन यूपीए सरकार ने इस मामले में हलफनामा दाखिल कर सेतु समुद्रम परियोजना के लिए राम सेतु को तोड़ कर तय वर्तमान मार्ग से ही लागू किये जाने पर जोर देते हुए कहा था कि भगवान राम के अस्तित्व में होने के बारे में कोई पुख्ता साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। ये भी कहा था कि रामायण महज कल्पित कथा है। यूपीए सरकार के इस हलफनामे पर काफी हंगामा हुआ था जिसके बाद आनन-फानन में सरकार ने अपना वह हलफनामा कोर्ट से वापस ले लिया था।

 

Posted By: Tilak Raj