आज की हमारी कल्पना कल की सैन्य क्षमताएं बनेंगीं, राजनाथ सिंह ने MSME और स्टार्ट-अप पर दिया जोर
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भविष्य के युद्ध में तकनीकी नेतृत्व रणनीतिक लाभ तय करेगा और डीआरडीओ-उद्योग साझेदारी को उत्पादन से आगे अनुसंधान तक बढ़ाना चाहिए।

आज की हमारी कल्पना कल की सैन्य क्षमताएं बनेंगीं।
HighLights
भविष्य के युद्ध में तकनीकी नेतृत्व रणनीतिक लाभ निर्धारित करेगा।
डीआरडीओ-उद्योग साझेदारी अनुसंधान, डिजाइन, परीक्षण तक विस्तारित हो।
आत्मनिर्भर भारत हेतु एमएसएमई, स्टार्ट-अप की महत्वपूर्ण भूमिका।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि तकनीकी नेतृत्व भविष्य के युद्ध में रणनीतिक लाभ निर्धारित करेगा।
सिंह ने कहा कि डीआरडीओ और उद्योग के बीच साझेदारी केवल उत्पादन तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे अनुसंधान, डिजाइन, परीक्षण, प्रमाणन और पूरी निर्माण मूल्य शृंखला तक बढ़ाना चाहिए। बड़े उद्योगों के साथ ही एमएसएमई और स्टार्ट-अप को भी मूल्य शृंखला का एक अभिन्न हिस्सा बनाना चाहिए।
रक्षा मंत्री राजनाथ ने मंगलवार को डीआरडीओ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कहा कि 2047 तक एक विकसित भारत का दृष्टिकोण केवल एक आर्थिक रूप से मजबूत भारत बनाने के बारे में नहीं है, बल्कि यह "तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर, सामाजिक रूप से समावेशी, पर्यावरणीय रूप से सतत और रणनीतिक रूप से सुरक्षित भारत" बनाने के बारे में है।
रक्षा क्षेत्र इस दृष्टिकोण की "नींव" है। 2047 तक हमें महत्वपूर्ण तकनीकों में आत्मनिर्भरता प्राप्त करनी है, स्वदेशी सामग्री में महत्वपूर्ण वृद्धि करनी है, रक्षा निर्यात में कई गुना वृद्धि करनी है और हमें वैश्विक आपूर्ति शृंखला में भारत की मजबूत उपस्थिति सुनिश्चित करनी होगी।
रक्षा मंत्री ने कहा कि उभरती तकनीकें, विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ड्रोन, भविष्य के युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी और उन्होंने क्षेत्र को तकनीकी नवाचार को तेज करने के लिए प्रेरित किया। हम देख रहे हैं कि एआई का उपयोग कैसे किया जा सकता है। खुशी तब होगी जब आप भविष्य की 40-50 साल आगे की छवि प्रस्तुत कर सकें।"
उन्होंने भारतीय रक्षा क्षेत्र के हितधारकों से इस दिशा में काम करने का आग्रह किया,"हम भारत को 40-50 साल बाद कैसे देखना चाहते हैं, यह कल्पना स्वयं हमारे उत्साह को नई ऊर्जा देगी।" सिंह ने स्टार्ट-अप और एमएसएमई की भी प्रशंसा यह कहते हुए कि वे रक्षा क्षेत्र में नए ध्वजवाहक के रूप में उभरे हैं।
"आत्मनिर्भर भारत" के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए स्टार्ट-अप और एमएसएमई की महत्वपूर्ण भूमिकाएं हैं। भारत में एक नई रक्षा स्टार्ट-अप लहर उभर रही है और वे नवोन्मेषी, चपल और पारंपरिक रक्षा मॉडलों को बाधित कर रहे हैं। एमएसएमई को गुणवत्ता, डिलीवरी, नवाचार और वैश्विक मानकों पर ध्यान केंद्रित करना होगा और बड़े उद्योगों के साथ साझेदारी को बढ़ाना होगा।
निवेशक कंपनियां भविष्य में तकनीकी नेता के रूप में उभरेंगी
राजनाथ सिंह ने कहा कि नई और उभरती तकनीकों में निवेश करने वाली कंपनियां भविष्य में तकनीकी नेता के रूप में उभरेंगी। हमें केवल भविष्य की तकनीक की कल्पना नहीं करनी है, बल्कि हमें आज भविष्य की तकनीक विकसित करनी है। क्योंकि, भविष्य के युद्ध में केवल वही देश रणनीतिक लाभ प्राप्त कर सकेगा, जो तकनीक में अग्रणी होगा।
डीआरडीओ के कई वरिष्ठ अधिकारियों और रक्षा उद्योग की कंपनियों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में सिंह ने कहा कि डीआरडीओ और उद्योग के बीच की साझेदारी भारत को रक्षा निर्माण का एक वैश्विक केंद्र बना सकती है। इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है। कुछ दशकों में रक्षा क्षेत्र में सुधार "असाधारण" रहे हैं।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
