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'हिंद-प्रशांत में किसी देश को पक्ष चुनने पर मजबूर न किया जाए', बोले राजनाथ सिंह

Published: Wed, 14 Oct 2026 08:10 PM (IST)

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आसियान-भारत डिफेंस थिंक टैंक फोरम में कहा कि भारत एक ऐसा हिंद-प्रशांत क्षेत्र चाहता है ...और पढ़ें

हिंद प्रशांत के देशों को कोई पक्ष चुनने पर मजबूर न किया जाए। (पीटीआई)

हिंद प्रशांत के देशों को कोई पक्ष चुनने पर मजबूर न किया जाए। (पीटीआई)

HighLights

  1. हिंद-प्रशांत में किसी देश पर पक्ष चुनने का दबाव न हो।

  2. विश्वास, संप्रभुता सम्मान, अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन जरूरी।

  3. भारत आसियान को रक्षा सहयोग, प्रौद्योगिकी में मदद को तैयार।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रथम आसियान-भारत डिफेंस थिंक टैंक फोरम में स्पष्ट कहा कि भारत ऐसा हिंद-प्रशांत चाहता है जहां कोई देश किसी पक्ष को चुनने के लिए मजबूर न हो। उन्होंने कहा कि सभी देशों को अपनी पसंद खुद करने, हितों की रक्षा करने और शांति से विकास करने का अवसर मिलना चाहिए।

राजनाथ सिंह ने जोर दिया कि विश्वास बनाना, एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करना, अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करना और संवाद के रास्ते खुले रखना ही सीमा-रहित चुनौतियों से निपटने का सही रास्ता है।

 भारत और आसियान दोनों खुले-समावेशी हिंद-प्रशांत के पक्ष में- राजनाथ

उन्होंने कहा कि भारत और आसियान दोनों शांति, स्थिरता और खुले-समावेशी हिंद-प्रशांत के पक्ष में हैं। भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी, सागर और महासागर दृष्टि आसियान-नेतृत्व वाले तंत्रों के जरिए बहुध्रुवीय सहयोग को मजबूत करती है। क्षेत्र में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा, समुद्र में दबाव और आतंकवाद, साइबर अपराध, पायरेसी तथा आपूर्ति श्रृंखला के खतरे बढ़ रहे हैं। कोई भी देश इन्हें अकेले नहीं संभाल सकता। इसलिए मतभेदों पर जल्दी और शांतिपूर्ण चर्चा जरूरी है, ताकि वे विवाद न बनें।

समुद्री सुरक्षा पर सिंह ने कहा कि हिंद महासागर और दक्षिण-पूर्व एशिया के जल एक जुड़े हुए समुद्री क्षेत्र हैं। स्थिर और नियम-आधारित व्यवस्था के लिए मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस, इंटरआपरेबिलिटी और अंडरवाटर सहयोग बढ़ाना जरूरी है। 2026 को आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष घोषित किए जाने को उन्होंने व्यावहारिक कदमों का मौका बताया। सूचना साझाकरण, नौसेना-तटरक्षक सहयोग और आपात स्थितियों में एकजुट प्रतिक्रिया बढ़ाने पर उन्होंने बल दिया।

आत्मनिर्भर भारत का मतलब अलग-थलग रहना नहीं- राजनाथ

रक्षा औद्योगिक सहयोग पर उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का मतलब अलग-थलग रहना नहीं है। यह विश्वसनीय साझेदारों के साथ सह-विकास, सह-उत्पादन, रखरखाव और सुधार के अवसर खोलता है। प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सिंह ने कहा कि एआई, ड्रोन, साइबर और स्पेस-आधारित प्रणालियां तेजी से महत्वपूर्ण हो रही हैं।

हालिया संघर्षों ने दिखाया कि कम लागत वाले ड्रोन महंगे सिस्टम को चुनौती दे सकते हैं। इसलिए व्यावहारिक, किफायती समाधान जरूरी हैं। भारत पेट्रोल वेसल, रडार, एयर डिफेंस सिस्टम, हेलीकॉप्टर और ड्रोन जैसे क्षेत्रों में आसियान देशों की जरूरत के मुताबिक सहयोग के लिए तैयार है। इससे स्थानीय क्षमता और विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखलाएं मजबूत होंगी।