'भौगोलिक सीमाओं से परे देखनी होगी राष्ट्रीय सुरक्षा', रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का भविष्य की तैयारियों पर बड़ा जोर
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जोर दिया कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति को पारंपरिक भौगोलिक सीमाओं से परे देखना ...और पढ़ें

रक्षा मंत्री ने भविष्य की रक्षा तैयारियों पर जोर दिया
HighLights
राष्ट्रीय सुरक्षा को पारंपरिक भौगोलिक सीमाओं से परे देखें।
बदलती सुरक्षा चुनौतियों को समझना और तैयारी बढ़ाना आवश्यक।
भारत की रणनीतिक सोच 2014 के बाद बदली है।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जोर दिया कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति को पारंपरिक भौगोलिक सीमाओं से परे देखना चाहिए। उन्होंने रक्षा तैयारियों को बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
रक्षा पर एक समागम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को कहा, राष्ट्रीय सुरक्षा को भौगोलिक सीमाओं से नहीं देखना चाहिए; यह एक पैरामीटर भ्रांति है... खतरे की सीमा अस्थिर हो गई है जबकि सीमाएं निश्चित हैं। यदि हमें राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है, तो हमें यह समझना होगा कि सुरक्षा चुनौतियां कैसे बदल रही हैं।
उन्होंने कहा, रक्षा सुरक्षा, ड्रोन और साइबर सुरक्षा अब आम आदमी के बीच चर्चा का विषय बन गए हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए हमें बदलती सुरक्षा चुनौतियों को समझना होगा।
सिंह ने यह भी बताया कि भारत की हार्ड और साफ्टपावर पूरक हो सकती है, न कि प्रतिस्थापन। उन्होंने कहा कि पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने स्वीकार किया था कि भारत "एक बुलबुले में जी रहा था", लेकिन इसके बाद के नेताओं ने स्थिति पर कार्रवाई करने में विफलता दिखाई। हमारी रणनीति में एक झूठा सहमति था।
सिंह ने कहा कि 2014 के बाद से भारत की रणनीतिक सोच में बदलाव आया है। भारत में रणनीतिक सोच में कभी भी बुद्धिमत्ता की कमी नहीं रही है। हमारे सोचने का तरीका 2014 के बाद से बदल गया है। हमारे पास तर्क की शक्ति और शक्ति का तर्क है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के ये बयान बदलती सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने और भविष्य के लिए तैयार सशस्त्र बलों की आवश्यकता पर जोर देते हैं।
(न्यूज एजेंसी एएनआई के इनपुट के साथ)
