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आने वाला समय AI, ड्रोन और रोबोटिक्स का... रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बोले- भारत को डिफेंस हब बनाना जरूरी

Published: Thu, 19 Mar 2026 09:00 PM (IST)

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने भारत को स्वदेशी ड्रोन उत्पादन का वैश्विक केंद्र बनाने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि ...और पढ़ें

भारत को स्वदेशी ड्रोन उत्पादन का वैश्विक केंद्र बनाना लक्ष्य

भारत को स्वदेशी ड्रोन उत्पादन का वैश्विक केंद्र बनाना लक्ष्य

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संजय मिश्र, नई दिल्ली। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य के मद्देनजर देश की रणनीतिक स्वायत्तता, रक्षा तैयारियों और सामरिक आत्मनिर्भरता के लिए स्वदेशी ड्रोन उत्पादन पारिस्थितिकी तंत्र को समय की आवश्यकता करार दिया है।

इस में शीघ्र कदम उठाने की जरूरत पर जोर देते हुए रक्षामंत्री ने कहा कि अगले कुछ वर्षों में भारत को स्वदेशी ड्रोन निर्माण के हब के रूप में स्थापित करने के लिए मिशन मोड में कार्य करना होगा। स्वदेशी ड्रोन निर्माण के लक्ष्य को हासिल करने के लिए रक्षामंत्री ने विशेषकर रक्षा क्षेत्र की एमएसएमई कंपनियों को सरकार की ओर से पूरी मदद देने की घोषणा की।

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भारत को स्वदेशी ड्रोन उत्पादन का हब बनाना लक्ष्य

रक्षामंत्री ने गुरूवार को मानेकशॉ सेंटर में रक्षा उत्पादन विभाग द्वारा 'उन्नत निर्माण प्रौद्योगिकी' विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय रक्षा उद्योग सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में यह बात कही। राजनाथ सिंह ने साफ कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर ईरान-इजराइल-अमेरिका टकराव तक के वर्तमान वैश्विक संघर्षों से स्पष्ट है कि ड्रोन और ड्रोन-रोधी तकनीकें भविष्य के युद्धों में निर्णायक भूमिका निभाएंगी।

इसलिए ड्रोन निर्माण में आत्मनिर्भरता केवल अंतिम उत्पाद तक सीमित नहीं होनी चाहिए बल्कि इसके सभी घटकों मसलन सांचे, सॉफ्टवेयर, इंजन और बैटरी आदि का निर्माण भी भारत में ही होना आवश्यक है। रक्षामंत्री ने कहा कि यह एक चुनौतीपूर्ण लक्ष्य है क्योंकि वर्तमान में अधिकांश ड्रोन निर्माण करने वाले देश महत्वपूर्ण उपकरणों के लिए विशेष रूप से चीन से आयात पर निर्भर हैं।

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भविष्य के युद्धों में ड्रोन की निर्णायक भूमिका होगी

रक्षामंत्री ने कहा कि किसी भी राष्ट्र का सशक्त रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र बड़े उद्योगों, लघु एवं मध्यम उद्यमों, स्टार्टअप्स और नवप्रवर्तकों के सामूहिक योगदान पर आधारित होता है। साथ ही यह सरकार की स्पष्ट और दूरदर्शी नीतिगत पहलों से भी संचालित होता है जो देश की विशिष्ट रक्षा आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की जाती हैं।

राजनाथ ने इस दिशा में निजी क्षेत्र से सक्रिय भागीदारी का आह्वान करते हुए कहा कि मोदी सरकार देश को स्वदेशी ड्रोन निर्माण का वैश्विक हब बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस दिशा में उद्योग जगत को हर संभव समर्थन प्रदान करेगी।रक्षामंत्री ने इस दौरान डिफेंस इंडिया स्टार्ट-अप चैलेंज के 14वें संस्करण और आईडेक्स फ्रेमवर्क के तहत अदिति चैलेंज के चौथे संस्करण का भी शुभारंभ किया।

रक्षा क्षेत्र में नवाचार, एमएसएमई को मिलेगा समर्थन

एमएसएमई और स्टार्ट-अप्स में डिजाइन-आधारित नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (डीपीएसयू) के माध्यम से 101 नवाचार चुनौतियों वाली एक नई पहल की भी रक्षामंत्री ने शुरुआत की। यह पहल रक्षा क्षेत्र में नवाचार, तकनीकी आत्मनिर्भरता और उद्योग-आधारित सिंहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

राजनाथ ने भी इसे गेम-चेंजर पहल बताते हुए कहा कि नवाचार धीरे-धीरे मूर्त उत्पादों एवं प्रौद्योगिकियों में तब्दील हो रहा है और स्टार्ट-अप तथा एमएसएमई की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। उन्होंने कहा कि एमएसएमई आज आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, रोबोटिक्स, आटोमेशन जैसे क्षेत्रों में सक्रिय रूप से लगे हुए हैं जो एक अभूतपूर्व व सकारात्मक परिवर्तन का प्रतिनिधित्व करता है। वर्तमान परि²श्य में यह सब नवाचार वैश्विक निर्माण क्षेत्र को नया आकार दे रहे हैं।