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देशभर में 'राजभवन' अब कहलाएंगे 'लोकभवन', छोटे बदलावों से बड़ा संदेश

Published: Tue, 02 Dec 2025 02:30 AM (IST)

देश में शासन के प्रतीकों में बदलाव हो रहा है, राज भवनों को 'लोक भवन' नाम दिया जा रहा है। ...और पढ़ें

नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री।

नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश में शासन के प्रतीकों में एक शांत लेकिन गहरा बदलाव जारी है। उपनिवेशकालीन शाही ठिकानों की छवि लिए राज भवनों को धीरे-धीरे “लोक भवन'' नाम दिया जा रहा है- यानी जनता का घर। यह सिर्फ नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि पिछले एक दशक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सार्वजनिक पदों की भावना को पुनर्परिभाषित करने की व्यापक पहल का हिस्सा है।

सत्ता की राह समझे जाने वाला 'राजपथ' 2022 में “कर्तव्य पथ'' बन गया- एक संदेश कि शासन दिखावे का मंच नहीं, जिम्मेदारी का मार्ग है। इसी विचार के अनुरूप, प्रधानमंत्री ने 2016 में सा, रेस कोर्स रोड छोड़कर “लोक कल्याण मार्ग'' को अपना आधिकारिक आवास बनाया, यह संकेत देते हुए कि सर्वोच्च पद नागरिकों की सेवा के लिए है।

कई प्रशासनिक भवनों के बदले नाम

भारत के प्रशासनिक केंद्र में अब “सेंट्रल सेक्रेटेरिएट'' नहीं, बल्कि “कर्तव्य भवन'' है- जहां अधिकारी शासन नहीं, सेवा की भावना के साथ कार्य करने का संकल्प याद रखते हैं। नार्थ और साउथ ब्लाक के नए परिसर को “सेवा तीर्थ'' नाम दिया गया है, जिसे नीतिनिर्माण का पवित्र स्थल समझा जा रहा है।सरकार के अनुसार यह बदलाव छवि निर्माण नहीं बल्कि शासन की सोच में परिवर्तन का प्रतीक है- सत्ता, नियंत्रण और दूरी के पुराने संकेतों को हटाकर सेवा, कर्तव्य और जवाबदेही को केंद्र में लाना।

छोटे बदलावों से मिल रहे बड़े संदेश

भारत जैसे सांस्कृतिक रूप से गहरे देश में नाम बदलना सिर्फ औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानसिकता में बदलाव की शुरुआत है। जब इमारतें स्वागत का संदेश दें और सड़कें जिम्मेदारी का, तो शासन का स्वरूप भी जनकेंद्रित बनता है। भारत अपने लोकतंत्र को नई भाषा दे रहा है- जहां शक्ति नहीं, जनता केंद्र में है।