नई दिल्ली, अनुराग मिश्र। दिल्ली बेहद उमस भरी गर्मी का सामना कर रही है। ऐसे में बारिश का सभी को बेसब्री से इंतजार है। मौजूदा समय में हवा की रफ्तार, आर्द्रता दोनों धीमे है जिसकी वजह से लोगों को असहजता महसूस हो रही है। कुछ दिनों पहले आए एक अध्ययन में सामने आया है कि दिल्ली में सबसे अधिक बारिश अगस्त माह में होती है। वहीं मध्य दिल्ली में दक्षिण पश्चिम मानसून के तहत होने वाली बारिश में 70 से 79 दिन सूखे होते हैं। अध्ययन के अनुसार, दक्षिण पश्चिम मानसून में 122 दिन वर्षा होती है।

मौसम विभाग के क्लाईमेट रिसर्च डिवीजन, क्लाईमेट अप्लीकेशन और यूजर इंटरफेस ग्रुप के वैज्ञानिकों पुलक, नितिन, प्रीथा मेनन, कुमार प्रसाद द्वारा दिल्ली में बीते तीस सालों के आंकड़ों के अध्ययन के बाद यह रिपोर्ट तैयार की गई है। रिपोर्ट कहती है कि दिल्ली में दक्षिण पश्चिम मानसून से अगस्त में 34 फीसद बारिश होती है, जबकि जुलाई माह में 31 फीसद बारिश होती है। अगस्त माह में औसतन 9 से 11 दिन बारिश होती है। जून से सितंबर माह में सालाना होने वाली बारिश की 83 फीसद बारिश होती है।

उत्तर पूर्व दिल्ली, उत्तर पश्चिम दिल्ली में दक्षिण पश्चिम मानसून से 87 से 88 फीसद बारिश होती है जबकि दक्षिण, दक्षिण पश्चिम और मध्य दिल्ली में 82 फीसद बारिश होती है। दक्षिण पश्चिम मानसून से मध्य दिल्ली और नई दिल्ली (580 मिलीमीटर से 610 मिलीमीटर) में सबसे अधिक बारिश होती है। पूर्वी क्षेत्र में दक्षिण पश्चिमी मानसून के 122 दिनों में से 25 से 26 दिन बारिश होती है जबकि पश्चिमी क्षेत्र में 21 से 22 दिन बारिश होती है।

बारिश देगी राहत

दरअसल, इस समय सामान्य तौर पर मानसून रेखा उत्तर भारत में रहती है। लेकिन इस समय मध्य प्रदेश में बने कम दबाव के क्षेत्र के चलते ये दक्षिण राजस्थान से होते हुए मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ होते हुए गुजर रही है। मध्य प्रदेश में बने कम दबाव में कमी आना शुरू हो चुकी है। अगले दो दिनों में ये दबाव काफी कम हो जाएगा। ऐसे में एक बार फिर मानसून रेखा उत्तर भारत की ओर आएगी। ऐसे में यहां अच्छी बारिश देखी जाएगी।

इसलिए हो रहा पसीने वाली गर्मी का अहसास

मौसम वैज्ञानिक समरजीत चौधरी के मुताबिक पिछले कुछ दिन से अधिकतम तापमान 34 से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। हवा में आर्द्रता का स्तर 50 फीसदी से ज्यादा बना हुआ है और हवा भी बहुत धीमी चल रही है। इसी के चलते लोगों को बेहद पसीने वाली गर्मी का अहसास हो रहा है। डिस्कंर्फेटबल इंडेक्स पर रेटिंग काफी ऊंची दर्ज की जा रही है। असुविधा सूचकांक एक सूचकांक है जिसमें हवा के तापमान और आर्द्रता को जोड़ता है, इसके जरिए इन पैरामीटर पर इंसान को महसूस होने वाली गर्मी का अनुमान लगाया जा सकता है। उदाहरण के लिए, जब हवा में आर्द्रता का स्तर 70 डिग्री हो और तापमान 32 डिग्री सेल्सियस (9 0 डिग्री फ़ारेनहाइट) हो और हवा बहुत धीरे हो, तो किसी इंसान को महसूस होने वाली गर्मी लगभग 41 डिग्री सेल्सियस (106 डिग्री फ़ारेनहाइट) के बराबर होती है।

प्रदूषण का भी बारिश पर असर

क्लाइमेट ट्रेंड्स की इस स्टडी में बताया गया है कि किस तरह से अधिक प्रदूषण के असर से अलग-अलग रीजन में मानसून पैटर्न में बदलाव आ रहा है। इतना ही नहीं, स्टडी में संभावना जताई गई कि आने वाले सालों में यदि प्रदूषण बढ़ता रहा, तो मानसून में बारिश कम से कम 10 प्रतिशत तक कम हो जाएगी। पूरे देश में मानसून की बारिश में प्रदूषण की वजह से 10 से 15 प्रतिशत की कमी आएगी। हालांकि, कुछ जगहों पर बारिश में यह कमी 50 प्रतिशत तक भी हो सकती है। इतना ही नहीं प्रदूषण का असर मानसून के आने और जाने के समय पर भी असर डाल रहा है। स्टडी के अनुसार, मानसून के पैटर्न में इस तरह के बदलाव दिल्ली और आसपास के एरिया में दिखने भी लगे हैं।

दक्षिण पश्चिम मानसून

दक्षिण पश्चिम मानसून बारिश से होने वाली मौसमी हवाएं हैं जो दक्षिण-पश्चिम दिशा से अरब सागर से भारत की मुख्य भूमि तक बहती हैं। वे मई के आसपास भारत को पार करना शुरू करते हैं, और भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, मानसून का आधिकारिक मौसम जून से सितंबर के बीच होता है। हिन्द महासागर में दक्षिण-पूर्व से बहने वाली इन हवाओं की दिशा भूमध्य रेखा को पार करने के बाद बदल जाती है और वह दक्षिण-पश्चिम दिशा की तरफ हो जाती है। इसी दिशा से बहने के कारण इसका नाम दक्षिण-पश्चिम मानसून पड़ा है। भूमि और जल के अलग-अलग तापमान के कारण भारत के भूभाग पर कम दाब बनता है जबकि आसपास की समुद्री सतह पर तुलनात्मक रूप से उच्च दाब का विकास होता है। यह मानसून के प्रभावित होने का एक प्रमुख कारक होता है।

देश में 80 फीसदी बारिश मानसूनी हवाओं से ही होती है। देश की खेती मानसूनी बारिश पर ही निर्भर है। बिहार, यूपी, एमपी और छत्तीसगढ़ में चावल, महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात में कपास, फिर तिलहन और मोटे अनाज का उत्पादन मानसूनी बारिश पर ही निर्भर करता है।

Edited By: Tilakraj