नई दिल्ली। एजेंसी कांग्रेस कार्यसमिति ([सीडब्ल्यूसी)] की सोमवार को हुई बैठक में उपाध्यक्ष राहुल गांधी से पार्टी का अध्यक्ष पद संभालने का सोमवार को सर्वसम्मत आग्रह किया गया। पार्टी के वरिष्ठ नेता एके एंटोनी ने बताया कि कई नेताओं ने इस बात को जोरदार ढंग उठाया कि राहुल गांधी अध्यक्ष पद संभाल लें। इस आग्रह पर राहुल ने फैसला पार्टी पर छोड़ दिया। पूर्व रक्षा मंत्री एंटोनी ने कहा कि यह ब़़डा ही उचित समय है कि कांग्रेस अपनी सारी शक्तियां नरेंद्र मोदी सरकार की तानाशाही के खिलाफ संगठित करे।

उन्होंने कहा कि यह पहला मौका है, जब सीडब्ल्यूसी में राहुल को अध्यक्ष बनाने की बात इतनी जोरदार ढंग से और सर्वसम्मति से उठाई गई। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि 'अंतिम फैसला पार्टी अध्यक्ष ([सोनिया गांधी)] द्वारा ही लिया जाना है।' मालूम हो कि सोनिया गांधी के अस्वस्थ होने की वजह से कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक की अध्यक्षता पहली बार राहुल गांधी ने की। सीडब्ल्यूसी के इस आग्रह पर राहुल की प्रतिक्रिया के बारे में पूछे जाने पर पार्टी के वरिष्ठ नेता तथा मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने कहा- 'कांग्रेस उपाध्यक्ष सीडब्ल्यूसी की बैठक में मौजूद थे।

उन्होंने कहा कि पार्टी तथा समिति जो फैसला करेगी, वह कोई भी चुनौती लेने को तैयार हैं। राहुल गांधी जी ने कहा कि वह भारतीय विचारधारा के लिए ल़़डना चाहते हैं और पार्टी कार्यकर्ता जो भी फैसला करेंगे, वह उस भूमिका के लिए तैयार हैं।'

उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी को लंबे समय से पार्टी अध्यक्ष बनाए जाने की बात चल रही है। सूत्रों के अनुसार बैठक में सबसे पहले एंटोनी ने राहुल के पार्टी का नेतृत्व संभालने की जरूरत की बात उठाई। एंटोनी के इस सुझाव का बैठक में मौजूद पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत सीडब्ल्यूसी के सभी अन्य सदस्यों ने समर्थन किया। राहुल गांधी को जनवरी 2013 में पार्टी का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया था। सोनिया गांधी 1998 से पार्टी की अध्यक्ष हैं और वह सबसे ज्यादा समय तक कांग्रेस अध्यक्ष रहने वाली बन गई हैं।

सरकार सत्ता के नशे में चूर

राहुल बैठक में राहुल ने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि लोकतंत्र 'घने अंधकार के दौर से गुजर रहा है' क्योंकि सरकार सत्ता के नशे में चूर है और 'उन सभी का मुंह बंद करना चाहती है', जो असहमति रखते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 'राष्ट्रीय सुरक्षा की आ़़ड में छुपकर, सवाल उठाने वाली सिविल सोसाइटी को आंखें दिखाई जा रही हैं।' हिंदी चैनल एनडीटीवी इंडिया पर लगाए गए एक दिवसीय प्रतिबंध की ओर इशारा करते हुए राहुल ने कहा-- 'टीवी चैनलों को सजा दी जा रही है और उनसे प्रसारण बंद करने को कहा गया है। सरकार को जवाबदेह ठहराने के लिए विपक्ष को गिरफ्तार किया जा रहा है।'

उन्होंने कहा कि सरकार अपनी ताकत का 'दुरपयोग' कर मूलभूत आजादी को दबाने का जो भी प्रयास कर रही है, उनसे ऐसी 'खतरनाक साजिशों' को परास्त करने की कांग्रेस की प्रतिबद्धता ही मजबूत होगी। पिछले कुछ दिनों से ओआरओपी ([वन रैंक वन पेंशन)] का मुद्दा उठा रहे राहुल ने कहा-- 'हालिया महीनों में हमारे जवानों को दशकों में पहली बार सर्वाधिक बलिदान देना प़़डा है। एक लापरवाह सरकार इसके बदले में क्रूरता के साथ उन्हें ओआरओपी से इनकार और विकलांगता पेंशन में कटौती से नवाज रही है।

Posted By: Sachin Bajpai