मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

संजय मिश्र, नई दिल्ली। कांग्रेस ने संसदीय दल की नेता के लिए एक बार फिर सोनिया गांधी पर भरोसा जताया है। पार्टी के नवनिर्वाचित लोकसभा और राज्यसभा सांसदों की बैठक में सोनिया गांधी को सर्वसम्मति से संसदीय दल का नेता चुना गया। लोकसभा में दस फीसद सीटें नहीं मिलने के कारण पार्टी विपक्ष के नेता पद के लिए दावा नहीं करेगी।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोनिया के नेता चुने जाने के बाद कहा कि भले ही लोकसभा में कांग्रेस के 52 सांसद हैं मगर भाजपा से इंच-इंच की लड़ाई लड़ने के लिए ये ही काफी हैं। लोकसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद पार्टी की सियासी चुनौतियों पर कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस के सामने आज वैसी ही स्थिति है, जैसा अंग्रेजों के समय थी जब कोई संस्था हमारा समर्थन नहीं कर रही थी।

राहुल ने मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों की तुलना ब्रिटिश राज से कर यह साफ संदेश दे दिया कि चुनावी शिकस्त के बावजूद वह अपनी आक्रामक शैली की सियासत में कोई बदलाव नहीं करेंगे। वहीं सोनिया गांधी ने रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाने की बात कहते हुए कहा कि आर्थिक सुधारों के साथ सभी प्रगतिशील और समावेशी नीतियों पर सरकार का कांग्रेस समर्थन करेगी। मगर विभाजनकारी कदमों का पुरजोर विरोध करेगी।संसद के सेंट्रल हॉल में शनिवार सुबह हुई कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने सोनिया गांधी का नाम नेता के लिए प्रस्तावित किया।

केरल के लोकसभा सांसद के सुधाकरण और तमिलनाडु की सांसद ज्योतिमणि एस. ने प्रस्ताव का अनुमोदन किया। पार्टी के सभी 52 लोकसभा और राज्यसभा सांसदों ने हाथ उठाकर एक सुर से सोनिया को नेता चुने जाने पर मुहर लगा दी। साथ ही कांग्रेस संसदीय दल का नेता चुनने के लिए सोनिया गांधी को अधिकृत कर दिया गया। वरिष्ठ नेताओं से चर्चा कर सोनिया लोकसभा में पार्टी के नेता का नाम जल्द तय कर देंगी। नेता चुने जाने के बाद पहले सोनिया ने और फिर राहुल गांधी ने सांसदों को संबोधित किया।

राहुल गांधी ने अपने संक्षिप्त संबोधन में सांसदों की हौसला अफजाई करते हुए कहा कि सभी कांग्रेसियों को यह याद रखना हैं कि हम संविधान के लिए लड़ रहे हैं। जाति-धर्म, रंग-रूप और प्रांतों से परे बिना किसी भेदभाव के हर नागरिक के लिए लड़ रहे हैं। इसीलिए हमें मजबूत और आक्रामक रहना होगा। इसमें लोकसभा में सीटें कम मिलने का मसला आड़े नहीं आएगा। राहुल ने कहा कि पिछली बार भाजपा के 282 के मुकाबले 44 सीटों पर थे तो मुझे लगा कि वाकई हमारे लिए मुश्किल होगा और हम इस संख्या से क्या कर पाएंगे।

मगर कुछ ही हफ्ते में अहसास हो गया कि हमारे 44 ही भाजपा के 282 से मुकाबला के लिए काफी हैं। इसीलिए वे गारंटी देते हैं कि कांग्रेस के 52 सांसद ही भाजपा से इंच-इंच की लड़ाई के लिए काफी हैं। कांग्रेस की कठिन चुनौतियों से सांसदों को रूबरू कराते हुए राहुल ने कहा कि हमारे खिलाफ कौन लड़ रहा है यह समझने की जरूरत है। संसद में जो लोग हमारा विरोध कर रहे हैं उन्होंने घृणा और क्रोध को हमारे खिलाफ हथियार बनाया है। कांग्रेस का प्रेम और सद्भाव ही भाजपा को सबसे बड़ी चुनौती लगती है। इसीलिए वह 'कांग्रेस-मुक्त भारत' की बात कहती है ताकि उनको खुली राह मिल जाए और कोई चुनौती देने वाला न रहे।

सांसदों को सदन में आक्रामक होने का संदेश देते हुए उन्होंने कहा वे अमूमन जितनी उंची आवाज में बोलते हैं उससे कुछ ज्यादा की जरूरत होगी। कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफे की पेशकश के बाद पहली बार पार्टी फोरम पर राहुल गांधी ने चुनाव में हुई चूकों पर आत्ममंथन की सोनिया गांधी की सलाह से सहमति जताई। उन्होंने कहा कि गलतियों से सीख लेकर ही पार्टी को नए तेवरों से लैस किया जा सकेगा। उन्होंने वरिष्ठ नेताओं की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि हम संविधान के लिए लड़ाई लड़ रहे थे मगर अब आप हर संस्था से लड़ाई लड़ रहे हैं।

राहुल ने कहा, 'इस देश में अब ऐसी कोई संस्था नहीं बची जो आपका समर्थन करे, कोई एक भी आपका समर्थन नहीं करेगा। यह अंग्रेजों के समय जैसी स्थिति है जब किसी संस्था ने कांग्रेस का समर्थन नहीं किया था मगर हमने संघर्ष किया और जीते। इस बार भी हम यही कर दिखाएंगे।' राहुल ने इस तेवर से साफ कर दिया कि चुनाव में उनके आक्रामक अभियान को लेकर चाहे जो सवाल उठाए जाएं मगर भाजपा और मोदी के खिलाफ आमने-सामने की राजनीतिक जंग का अपना अंदाज वह नहीं छोड़ेंगे।

इससे पहले सोनिया गांधी ने अपने संबोधन में कांग्रेस को वोट देने वाले सभी 12.3 करोड़ मतदाताओं को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि यह वोट संविधान की रक्षा, प्रगति और सामाजिक न्याय के साथ स्वतंत्रता के लिए है। रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाने के कांग्रेस के इरादे जाहिर करते हुए सोनिया ने यह भी कहा कि अब राज्यसभा में हमारा संख्या बल चुनौती पर है। इसीलिए समान विचारधारा वाले दलों के साथ समन्वय कर संसद में ऐसे मुद्दे उठाए जाने चाहिए जिनसे जनता का जुड़ाव हो। विपक्ष की अपनी सजग भूमिका में कांग्रेस कोई कोताही नहीं करेगी।

सोनिया ने इस दौरान कांग्रेस के चुनाव अभियान में राहुल गांधी के दिन रात की मेहनत और उनके नेतृत्व की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के खिलाफ आमने-सामने की लड़ाई में उतरकर राहुल ने अपने निर्भीक नेतृत्व को दर्शाया है। राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में कांग्रेस को फिर से जीवंत बनाया है और देश के हर कोने से आ रहे भावनात्मक संदेश उनके नेतृत्व क्षमता को साबित करते हैं। -

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Posted By: Krishna Bihari Singh

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