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'विपक्ष को बोलने से रोकना लोकतंत्र पर धब्बा' लोकसभा में हंगामे के बाद राहुल गांधी ने स्पीकर को लिखा लेटर

By Sanjay MishraEdited By: Garima Singh
Published: Tue, 03 Feb 2026 11:01 PM (IST)

राहुल गांधी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर राष्ट्रीय सुरक्षा पर बोलने की अनुमति न मिलने पर विरोध ...और पढ़ें

राहुल गांधी ने स्पीकर को राष्ट्रीय सुरक्षा पर बोलने से रोकने पर विरोध।

राहुल गांधी ने स्पीकर को राष्ट्रीय सुरक्षा पर बोलने से रोकने पर विरोध।

HighLights

  1. राहुल गांधी ने स्पीकर को राष्ट्रीय सुरक्षा पर बोलने से रोकने पर विरोध।

  2. इसे भारतीय लोकतंत्र पर एक गंभीर धब्बा बताया।

  3. संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन पर सवाल उठाए।

संजय मिश्र, नई दिल्ली। लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने सदन में राष्ट्रीय सुरक्षा के विषय पर बोलने की इजाजत नहीं दिए जाने पर स्पीकर ओम बिरला से विरोध जताते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र के लिए धब्बा बताया है।

इतिहास में पहली बार राष्ट्रपति अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर नेता विपक्ष को नहीं बोलने देने की बात उठाते हुए राहुल गांधी ने मंगलवार को स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर यह विरोध और नाराजगी जताई।

राहुल गांधी का स्पीकर पर बोलने से रोकने का आरोप 

लोकसभा में धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा में पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवाने की चीनी सेना के घुसपैठ से जुड़े प्रकरण पर लगातार दूसरे दिन नहीं बोलने दिए जाने के बाद कांग्रेस नेता ने अपने विरोध का इजहार करते हुए लोकसभा अध्यक्ष को मंगलवार को लिखे पत्र में यह बात कही।

राहुल गांधी ने पत्र में कहा है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान स्पीकर के निर्देश पर उन्होंने सदन में जिस पत्रिका का हवाला दिया था, उसे प्रमाणित भी कर दिया था।

इसके बावजूद उन्हें लोकसभा में बोलने से रोका गया, जो लंबे समय से चली आ रही संसदीय परंपराओं और पूर्व के स्पीकरों के निर्णयों के विरुद्ध है। किसी दस्तावेज को प्रमाणित किए जाने के बाद उस पर बोलने या उसका हवाला देने की अनुमति देना स्पीकर की जिम्मेदारी होती है और उसके बाद सरकार को जवाब देना होता है।

भारतीय लोकतंत्र पर एक गंभीर धब्बा: राहुल 

राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें नेता प्रतिपक्ष होने के नाते राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों को उठाना उनकी जिम्मेदारी है मगर उन्हें जानबूझकर बोलने से रोका गया, जबकि राष्ट्रपति के अभिभाषण में राष्ट्रीय सुरक्षा एक प्रमुख विषय था।

इसे सांसद और नेता विपक्ष की लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित करने वाली अभूतपूर्व स्थिति बताते हुए उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र पर एक गंभीर आघात है।

अधिकारों के हनन पर सवाल उठाए

स्पीकर की निष्पक्ष भूमिका की चर्चा करते हुए राहुल गांधी ने पत्र में कहा कि लोकसभा अध्यक्ष सदन के निष्पक्ष संरक्षक होते हैं।

प्रत्येक सदस्य, विशेषकर विपक्ष के सदस्यों के अधिकारों की रक्षा करना उनका संवैधानिक और संसदीय दायित्व है। विपक्ष के नेता और हर सदस्य का बोलने का अधिकार हमारे लोकतंत्र का अभिन्न अंग है।

राहुल गांधी ने अपने पत्र के आखिर में कहा 'संसदीय इतिहास में पहली बार, सरकार के कहने पर स्पीकर को विपक्ष के नेता को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलने से रोकना पड़ा है। यह हमारे लोकतंत्र पर एक धब्बा है, जिसके खिलाफ मैं अपना कड़ा विरोध दर्ज करता हूं।'