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बंगाल: जादवपुर विश्वविद्यालय में नियुक्तियों पर उठे सवाल, शिक्षक संगठन ने की सीबीआई जांच की मांग

Published: Sat, 12 Sep 2026 07:39 AM (IST)

जादवपुर विश्वविद्यालय में विभिन्न पदों पर नियुक्तियों में अनियमितता व पक्षपात के आरोप लगाते हुए शिक्षकों के संगठन अखिल भारतीय ...और पढ़ें

बंगाल: जादवपुर विश्वविद्यालय में नियुक्तियों पर उठे सवाल

बंगाल: जादवपुर विश्वविद्यालय में नियुक्तियों पर उठे सवाल

HighLights

  1. डिप्टी रजिस्ट्रार समेत विभिन्न पदों पर नियुक्तियों में अनियमितता व पक्षपात के आरोप

  2. ये नियुक्तियां पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल में हुई थीं

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। जादवपुर विश्वविद्यालय में विभिन्न पदों पर नियुक्तियों में अनियमितता व पक्षपात के आरोप लगाते हुए शिक्षकों के संगठन अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने पूरे मामले की सीबीआइ जांच की मांग की है।

ये नियुक्तियां पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल में हुई थीं। महासंघ की ओर से विश्वविद्यालय के कुलपति को पत्र लिखकर डिप्टी रजिस्ट्रार समेत विभिन्न पदों पर हुईं नियुक्तियों में अनियमितता, पक्षपात, भाई-भतीजावाद, प्रभाव के दुरुपयोग और वित्तीय गड़बड़ी का आरोप लगाया है। यह भी कहा है कि नियुक्ति के समय उम्मीदवारों की योग्यता व अनुभव का उचित सत्यापन नहीं किया गया।

एफईटी सचिव पद के लिए आदर्श आचार संहिता लागू रहने के दौरान साक्षात्कार आयोजित किए जाने पर भी सवाल उठाया गया है। महासंघ ने कहा कि इन सबकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।

मालूम हो कि गत गुरुवार को ही बंगाल विधानसभा में पश्चिम बंगाल विश्वविद्यालय और महाविद्यालय प्रशासन और विनियमन संशोधन विधेयक, 2026 पेश हुआ है।

कोलकाता में अवैध निर्माणों की सीबीआई जांच के दिए आदेश

कलकत्ता हाई कोर्ट ने कोलकाता में अवैध निर्माणों की शुक्रवार को सीबीआइ से जांच कराने के आदेश दिए। धड़ल्ले से हो रहे अवैध निर्माण का दावा करने वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश रवींद्र विट्ठलराव और न्यायमूर्ति तपब्रत चक्रवर्ती की खंडपीठ ने सीबीआई से 14 अक्टूबर को अदालत के समक्ष एक प्रारंभिक जांच रिपोर्ट पेश करने को कहा। उसी दिन मामले में अगली सुनवाई होगी।

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि कम से कम 42 ऐसे अवैध निर्माण हैं, जहां स्वामित्व (मालिकाना हक) स्थापित नहीं है। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि पहले इन निर्माणों को तोड़ने का निर्देश दिए जाने के बावजूद उस पर अमल नहीं हुआ।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने सवाल किया कि नगर निगम ने अब तक स्वत: संज्ञान लेकर जांच क्यों नहीं की और अवैध होने पर खुद निर्माण क्यों नहीं तोड़ा।

पहले नगर निगम की ओर से अदालत में दी गई रिपोर्ट में भी इन निर्माणों को अवैध बताया गया था। इसी आधार पर खंडपीठ ने सीबीआइ को उपलब्ध दस्तावेज और नगर निगम तथा पुलिस से जानकारी लेकर प्रारंभिक जांच करने का निर्देश दिया।