जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। एनपीआर और जनगणना पर बुलाई बैठक में गैर-भाजपा शासित कुछ राज्यों के अधिकारियों ने सिर्फ माता-पिता के जन्म-स्थान को लेकर पूछे जाने वाले सवाल पर सवाल उठाया और उसे हटाने का आग्रह किया। हालांकि वह तब मान गए जब केंद्र की ओर से स्पष्ट किया गया कि यह बाध्यकारी नहीं है। यह सवाल पहले भी पूछा जाता था इस बार केवल तरीका बदला गया है। पश्चिम बंगाल को छोड़कर सभी राज्यों के अधिकारी बैठक में मौजूद थे।

राजस्थान के मुख्य सचिव डीबी गुप्ता ने बैठक में उठाए गए मुद्दों की जानकारी देते हुए कहा कि राजस्थान ही नहीं, कई राज्यों की ओर से माता-पिता के जन्म स्थान के सवाल को औचित्यहीन बताया गया। उनके अनुसार कई बार गांवों में और यहां तक शहरों में भी व्यक्ति को खुद की पैदाइश का भी पता नहीं होता। ऐसे में माता-पिता का जन्म-स्थान कई लोग नहीं बता पाएंगे। उनके अनुसार इस अव्यवहारिक सवाल को हटाने की मांग की गई।

लेकिन गृहमंत्रालय के अधिकारियों ने इस सवाल को हटाने से साफ इनकार दिया। उसका कहना था। एनपीआर के दौरान पहले भी यह पूछा गया था। पिछली बार यदि किसी के माता-पिता जिंदा हैं और दूसरी जगह रहते हैं, तो वे वहां अपना जन्म-स्थान बता रहे थे और बच्चे अपना जन्म-स्थान बता रहे थे। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार केवल उन दोनों को लिंक कर दिया है। इसके बावजूद कोई इस सवाल का जवाब देने से इनकार कर सकता है। इसका जवाब देना बाध्यकारी नहीं है। ऐसे में इस सवाल को पूरी तरह हटाना उचित नहीं रहेगा।

केंद्र सरकार की ओर से की गई तैयारियों की दी गई जानकारी 

शुक्रवार को हुई बैठक में सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और जनगणना निदेशकों को बुलाया गया था। कुछ राज्यों ने मुख्य सचिव की जगह पर प्रमुख सचिव को भेजा था। बैठक में जनगणना की अहमियत के साथ-साथ सही आंकड़े जुटाने की जरूरत पर बल दिया गया। उन्हें जनगणना के लिए केंद्र सरकार की ओर से की गई तैयारियों की जानकारी दी गई। खासतौर पर पहली बार मोबाइल ऐप के सहारे हो रही जनगणना पर विस्तृत प्रजेंटेशन भी दिया गया। बैठक में केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला के साथ-साथ भारत के महापंजीयक व गृहमंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

Posted By: Sanjeev Tiwari

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