आसमान में उड़ता 'किला' लेकर भारत आए पुतिन, कितना खास है रूस का 'डूम्सडे प्लेन'?
रूस का 'फ्लाइंग क्रेमलिन' और अमेरिका का 'नाइटवॉच' उन चुनिंदा विमानों में शामिल हैं, जिन्हें इस तरह डिजाइन किया गया ...और पढ़ें

HighLights
पुतिन हाई-लेवल डेलीगेशन और कड़ी सुरक्षा के बीच दिल्ली पहुंचे।
वे दो एक जैसे इल्यूशिन IL-96-300PU विमानों में से एक में सवार होकर आए।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तीन दिवसीय यात्रा पर शुक्रवार को नई दिल्ली पहुंचे। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक की, जिसमें व्यापार, निवेश और ऊर्जा सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। पुतिन एक हाई-लेवल डेलीगेशन और कड़ी सुरक्षा के बीच दिल्ली पहुंचे।
पुतिन जिस खास विमान से भारत आए वह काफी चर्चा में है। वे दो एक जैसे इल्यूशिन IL-96-300PU विमानों में से एक में सवार होकर आए। इसे अक्सर 'फ्लाइंग क्रेमलिन' और 'डूम्सडे प्लेन' कहा जाता है। यह कोई सामान्य विमान नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर आसमान में ही कमांड सेंटर के रूप में काम करने के लिए तैयार रहता है।

एक नहीं, दो विमान एक साथ उड़ते हैं
पुतिन की सुरक्षा व्यवस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके लिए एक जैसे दो Ilyushin IL-96-300PU विमान एक साथ उड़ान भर सकते हैं। दोनों विमान एक साथ हवा में रहते हैं, ताकि पुतिन वास्तव में किस विमान में सवार हैं, इसकी जानकारी किसी को न लग पाए।
सुरक्षा के हिसाब से यह रणनीति रूस के लिए नई नहीं है। पुतिन अपनी विदेश यात्राओं के दौरान पहले भी इस तरह की डिकॉय व्यवस्था का इस्तेमाल कर चुके हैं। इसका मकसद राष्ट्रपति के वास्तविक विमान की पहचान को संभावित खतरे से छिपाना है।
'आसमान का ऑरस' क्यों कहा जाता है?
पुतिन के इस विमान को विशेष सुरक्षा और क्षमता के कारण 'आसमान का ऑरस' भी कहा जाता है। जिस तरह रूस की 'ऑरस सेनाट' कार को राष्ट्रपति की बेहद सुरक्षित आधिकारिक कार माना जाता है, उसी तरह IL-96-300PU को राष्ट्रपति के लिए विशेष रूप से तैयार विमान के तौर पर देखा जाता है। इस विमान का मूल डिजाइन इल्युशिन डिजाइन ब्यूरो ने 1980 के दशक में विकसित किया था। बाद में इसे रूसी राष्ट्रपति और शीर्ष नेतृत्व की जरूरतों के अनुसार इसमें बदलाव किए गए।

परमाणु युद्ध की स्थिति में भी बन सकता है कमांड सेंटर
'डूम्सडे प्लेन' नाम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इस तरह के विमानों को ऐसी परिस्थितियों के लिए तैयार किया जाता है, जब जमीन पर मौजूद सैन्य कमांड सेंटर किसी बड़े युद्ध, परमाणु हमले या आपदा के कारण काम करने की स्थिति में न हों। टाइम्स के अनुसार, IL-96-300PU में अत्याधुनिक और सुरक्षित संचार प्रणाली लगी है। इसके जरिए रूस के सैन्य, खुफिया और सरकारी नेटवर्क से एन्क्रिप्टेड सैटेलाइट संचार के माध्यम से संपर्क बनाए रखा जा सकता है। यह गंभीर राष्ट्रीय आपात स्थिति में भी हवा में रहते हुए महत्वपूर्ण फैसले लेने और सैन्य नेटवर्क से संपर्क बनाए रखने में सक्षम रह सकता है।
11 हजार किलोमीटर तक उड़ान
विमान में चार Aviadvigatel PS-90A टर्बोफैन इंजन लगे हैं। इसकी उड़ान क्षमता करीब 11000 किलोमीटर बताई जाती है। लंबी दूरी तक बिना ईंधन भरे उड़ान भरने की क्षमता इसे विदेशी दौरों और आपात परिस्थितियों दोनों के लिए उपयोगी बनाती है। विमान में सुरक्षित रेडियो और डेटा चैनल के साथ-साथ रडार-जैमिंग तकनीक और एडवांस सुरक्षा प्रणालियां भी मौजूद हैं। इनका उद्देश्य संभावित हमले या संचार बाधित करने की कोशिशों के बीच राष्ट्रपति और कमांड नेटवर्क को सुरक्षित रखना है।

अंदर से राष्ट्रपति के लिए लग्जरी इंतजाम
इतनी भारी सुरक्षा और सैन्य संचार प्रणाली के बावजूद विमान के अंदर राष्ट्रपति के आराम का भी पूरा ध्यान रखा गया है। इसमें निजी राष्ट्रपति सुइट, बेडरूम, बाथरूम, किचन, डाइनिंग एरिया और बैठक के लिए कॉन्फ्रेंस रूम जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। यानी यह विमान एक साथ राष्ट्रपति का सुरक्षित सफर, मोबाइल कमांड सेंटर और उच्चस्तरीय कार्यालय की भूमिका निभा सकता है।
अमेरिका के पास भी है ऐसा 'डूम्सडे प्लेन'
रूस अकेला देश नहीं है जिसके पास इस तरह की विशेष क्षमता वाला विमान है। अमेरिका भी इसी उद्देश्य के लिए Boeing E-4 Nightwatch का संचालन करता है। Boeing E-4 को 747-200B विमान के आधार पर तैयार किया गया था। इसे अमेरिकी राष्ट्रपति, रक्षा मंत्री और शीर्ष नेतृत्व के लिए हवाई आपातकालीन कमांड पोस्ट के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा अमेरिका के पास Boeing E-6 Mercury भी है। यह विमान अमेरिकी राष्ट्रीय कमांड प्राधिकरण और बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों के बीच संचार कड़ी के रूप में काम करता है।
