नई दिल्ली (जागरण ब्यूरो)। पाकिस्तान इस बात से खुश है कि मसूद अजहर पर जिस प्रस्ताव के तहत प्रतिबंध लगाया गया है उसमें कश्मीर का जिक्र नहीं है। लेकिन भारत इसे खास तवज्जो नही दे रहा। भारत का कहना है कि उसकी मंशा मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करवाने की थी और उसमें सफलता मिली है। जहां तक इस कश्मीर का जिक्र नहीं होने का सवाल है तो अजहर पर प्रतिबंध लगाने में पुलवामा हमले का अहम योगदान रहा है। पाकिस्तान इसे अपनी जीत इसलिए बताने में जुटा है कि उसे घरेलू स्तर पर इस बड़ी कूटनीतिक हार की गलत तस्वीर पेश की जा सके।

सनद रहे कि बुधवार को यूएन की 1267 समिति की तरफ से पारित प्रस्ताव में कश्मीर या पुलवामा का जिक्र नहीं है। माना जा रहा है कि यह चीन और अमेरिका ने बीच की राह निकालने के लिए ऐसा किया है। चीन के विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में भी इस बात का संकेत दिया गया है कि वह संशोधित प्रस्ताव का गहन अध्ययन करने के बाद वीटो हटाने को तैयार हुआ जबकि पाकिस्तान ने इस बात पर खुशी जताई है कि प्रस्ताव में कोई राजनीतिक जिक्र नहीं है।

भारत का तर्क है कि अजहर पर प्रतिबंध किसी एक घटना के संदर्भ में नहीं लगा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक, ''अजहर जितने भी आतंकी घटनाओं में शामिल रहा है उसे देखते हुए यह प्रतिबंध लगा है।'' एक तरह से देखा जाए तो सभी पक्ष इसे अपनी जीत बता रहे हैं। यहां तक कि अमेरिका विदेश मंत्री माइकल पोम्पिओ ने भी इसे अमेरिकी कूटनीति की जीत बताई है जो दक्षिण एशिया में शांति बहाली के लिए काम करेगा।

भारत का कहना है कि 'संयुक्त राष्ट्र में लिस्टिंग का जो प्रस्ताव होता है वह किसी आतंकी का बायोडेटा नहीं होता है कि उसमें हर चीज का उल्लेख हो। लेकिन जिस तरह अंतरराष्ट्रीय दबाव बना, चीन ने अपना रुख बदला, बड़े देशों में मजबूती के साथ लगकर अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करने का मन बनाया उसमें पुलवामा का भी हाथ था और रकार का भी जिसमे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुख्ता सबूत पेश किए।'

Posted By: Prateek Kumar

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