राज्‍य ब्‍यूरो, रायपुर। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने आयुष्मान भारत की रिपोर्ट में पर्दाफाश किया है कि गरीबों के इलाज के लिए बनी इस योजना का सबसे ज्यादा फायदा प्राइवेट अस्पताल उठा रहे हैं। देश के अन्य राज्यों की तुलना में छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा प्राइवेट अस्पतालों ने क्लेम किए हैं। प्राइवेट सेक्टर में इलाज का खर्च सरकारी सेक्टर के मुकाबले दो से तीन गुना ज्यादा है। छत्तीसगढ़ में पैकेज से ज्यादा राशि लेने पर 76 अस्पतालों पर कार्रवाई भी की गई।

 हेल्थ अथॉरिटी की रिपोर्ट से सामने आया सच

नेशनल हेल्थ अथॉरिटी की रिपोर्ट के अनुसार, पैकेज से ज्यादा राशि लेने के मामले में भी छत्तीसगढ़ नंबर वन पर है। महाराष्ट्र, गुजरात और तमिलनाडु छत्तीसगढ़ से पीछे हैं। आयुष्मान योजना में गरीबों का पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज करना है। छत्तीसगढ़ में गर्भाशय की बीमारी से संबंधित मामले सबसे ज्यादा प्राइवेट अस्पताल में गए। देशभर में हुए ऑपरेशन की तुलना में अकेले छत्तीसगढ़ में 21 फीसद से ज्यादा मामले आए हैं। प्रदेश में यह बीमारी 40 से लेकर 45 वर्ष की महिलाओं में सबसे ज्यादा पाई गई है।

अनावश्यक रूप से क्लेम किया गया

रिपोर्ट की मानें तो इस उम्र में गर्भाशय को निकालने से इनफेक्शन का खतरा बना रहता है। बावजूद इसके प्राइवेट अस्पताल के चिकित्सकों ने ऑपरेशन किए। गर्भाशय से जुड़े दो तिहाई क्लेम प्राइवेट अस्पताल के आए हैं। रिपोर्ट में यह आशंका भी जताई गई है कि ऑपरेशन की राशि लेने के लिए अनावश्यक रूप से क्लेम किया गया है। इसके साथ ही नवजात शिशु संबंधी बीमारी के सबसे ज्यादा क्लेम किए गए। इसके इलाज में भी सरकारी अस्पताल की तुलना में दोगुना क्लेम किया गया।

विशेष प्राइवेट अस्पतालों में सबसे ज्यादा मामले

रिपोर्ट में यह भी पता चला है कि आयुष्मान भारत योजना में कुछ विशेष अस्पतालों को फायदा पहुंचाया गया। इन अस्पतालों में मरीजों को ज्यादा से ज्यादा संख्या में इलाज कराने के लिए भेजा गया।

 

Posted By: Arun Kumar Singh

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