नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस की तल्खी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा ढांचागत क्षेत्रों से जुड़े तमाम बड़े फैसलों के लिए बुलाई गई बैठक में भी दिखी। इस बैठक में रेलवे की परियोजनाओं से जुड़े कई फैसले भी लिए जाने थे, लेकिन तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी के करीबी और रेल मंत्री मुकुल राय ने इसमें जाना जरूरी नहीं समझा। रेलवे पर बड़े फैसलों में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने के बजाय मुकुल राय उत्तर प्रदेश की मांठ विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में अपने पार्टी प्रत्याशी के समर्थन में प्रचार करने पहुंच गए।

बैठक से मुकुल राय की गैरमौजूदगी को संप्रग में प्रमुख सहयोगी तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस के बिगड़ते रिश्तों के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा पश्चिम बंगाल के लिए विशेष पैकेज की मांग पर केंद्र सरकार की कथित हीलाहवाली से दोनों दलों के बीच तनातनी पिछले कई महीनों से जारी है।

पश्चिम बंगाल में नगर पालिका चुनाव में जीत के बाद मुकुल राय ने मंगलवार को यहां तक कह दिया था कि अब तृणमूल राज्य में अकेले शासन करने में सक्षम है। यह अलग बात है कि राष्ट्रपति चुनाव को देखते हुए कांग्रेस नेतृत्व अभी सीधे तौर पर तृणमूल से टकराव लेने से बच रहा है।

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