नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्य और वरिष्ठ वकील प्रशांत ने पार्टी की पीएसी से खुद को बाहर का रास्ता दिखाए जाने पर पहली बार प्रतिक्रिया जाहिर की। उन्होंने इसे ‘आप’ का दुर्भाग्यपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि इससे पार्टी में आस्था रखने वाले लाखों लोगों में गलत सदेश गया।

उन्होंने एक न्यूज चैनल से बातचीत में स्वीकारा कि आप के भीतर आतंरिक लोकतंत्र और स्वराज खत्म हो रहा था, जिससे वे आहत थे। लिहाजा, उन्होंने और योगेंद्र यादव ने इसे गंभीरता के साथ उठाया और नतीजा ये रहा। हालांकि उन्हें उम्मीद है कि पार्टी के भीतर जल्द सब कुछ ठीक हो जाएगा और उनके भीतर पुन: एकजुटता कायम होगी।

प्रशांत ने कहा कि ‘’यह पार्टी लाखों लोगों ने खून पसीने से ‘नई आइडियोलॉजी’ के तहत बनाई। लोगों की आस्था थी कि यह दल नई राजनीति के नियम कायम करेगी। मैं इस पार्टी में इसलिए शामिल हुआ क्योंकि मुझे अपेक्षा थी कि यह पार्टी अन्य राजनीतिक दलों से अलग होगी, लेकिन धीरे-धीरे लगने लगा कि कुछ मामलों में पार्टी सिद्धांतों से बिछड़ रही है। इनसे मैं दुखी था और इस संदर्भ में मैंने कई मुद्दों को उठाया था। हालांकि प्रशांत ने यह भी कहा कि पार्टी में विचारधारा की कोई लड़ाई नहीं है।

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Posted By: Test2 test2

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