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गोरखपुर (प्रेम नारायण द्विवेदी)। पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य यांत्रिक इंजीनियर कार्यालय के अभियंता और कर्मचारियों ने निरोग जीवन के लिए परिसर में ही ‘महर्षि पतंजलि’ वाटिका तैयार की है। इस वाटिका में विभिन्न नामों से 24 वाटिकाएं हैं। इनमें एक महत्वपूर्ण प्राणायाम वाटिका भी है, जो रेलकर्मियों के तन और मन को निरोग बना रही है। महर्षि पतंजलि वाटिका में पिछले वर्ष अंतराष्ट्रीय योग दिवस के दिन ही छह वाटिकाएं स्थापित की गईं, जिसमें र्अंहसा वाटिका, सत्य वाटिका, नियम वाटिका, प्राणायाम वाटिका, धारणा वाटिका और ब्रह्मचर्य वाटिका शामिल हैं। इन वाटिकाओं को अभियंताओं ने अपने नाम से स्थापित किया है। इनमें दुर्गेश चंद्र मिश्र और रमेश कुमार पांडेय की वाटिका प्राणायाम वाटिका लोगों को स्वस्थ बना रही है।

वाटिका में अभियंता ही नहीं रेलकर्मी भी नियमित रूप से प्राणायाम और साधना करते हैं। कार्य के दबाव के बीच वे अपने मन-मस्तिष्क को मजबूत बना रहे हैं। घर की थकान और कार्यालय का दबाव वाटिका में पहुंचते ही समाप्त हो जाता है। मुख्य यांत्रिक इंजीनियर एके सिंह के मार्गदर्शन में अभियंता और कर्मचारी श्रमदान के जरिये रोजाना वाटिका की देखभाल करते हैं। इसके बाद योग-साधना करते हैं। इससे न केवल कार्यालय परिसर साफ-सुथरा रहता है, बल्कि पर्यावरण भी संरक्षित होता है। शारीरिक श्रम के अलावा योगसे रेलकर्मी तन और मन से मजबूत बन रहे हैं। कार्यालय और घर का कार्य भी सहजता पूर्वक संपन्न होता है।

बकौल मुख्य यांत्रिक इंजीनियर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल रंग ला रही है। देश ही नहीं विदेशों में भी लोग योग को अपना रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण के अलावा स्वच्छता अभियान नए भारत का निर्माण कर रहा है। कार्यालय परिसर कभी उजाड़ था। आज चारों तरफ स्वच्छता और हरियाली है। फूलों की खुशबू वातावरण को खुशनुमा बना रही हैं। इन योजनाओं को आत्मसात कर ले तो सबकुछ बदला नजर आएगा।

 

Posted By: Srishti Verma

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