नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। Surgical Strike 2- Pulwama Terror Attack के बाद पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए भारतीय वायुसेना ने सर्जिकल स्ट्राइक की है। 26 फरवरी तड़के करीब 3.30 बजे भारतीय सेना के 12 लड़ाकू विमानों ने पाकिस्तान सीमा में प्रवेश किया और 1000 किलो बम गिराए, जिससे जैश का मुख्यालय तहस-नहस हो गया। इसके बाद मंगलवार को पाकिस्‍तान के तीन लड़ाकू विमानों ने भारतीय हवाई सीमा में प्रवेश किया जिसमें से एक को मार गिराया गया। 

कारगिल को मिलाकर पाकिस्तान अब तक चार बार भारत से भिड़ चुका है। इन चारों जंगों के हर मोर्चे पर उसे भारी शिकस्त मिली है। भारत ने उसे ऐसे घाव दिए हैं जिनकी टीस वहां की नस्लों को सालती रहती है। पूर्वी पाकिस्तान के रूप में बांग्लादेश के अभ्युदय को शायद ही यह देश कभी भूल पाए।

बलूचिस्तान में सुलग रही चिंगारी को बस हवा देने की जरूरत है, लेकिन शांति प्रिय पड़ोस के रूप में भारत को पाकर उसे इन बातों की जैसे फिक्र नहीं है। ऐसे में अगर पांचवी जंग होती है तो आर्थिक रूप से खस्ताहाल इस देश की दुर्गति तो तय है। सैन्य साजोसमान पर बारीक नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था सीपरी की मानें तो हथियारों के जखीरे में पाकिस्तान बहुत पीछे छूटता है। भारत से उसका कोई मुकाबला नहीं।

ऐसी है सैन्य ताकत

भारतीय सेना में कुल कर्मचारियों की बात करें तो हमारे देश में 1.2 मिलियन यानि 12 लाख से ज्यादा सैनिक हैं, जो हर समय युद्ध के लिए तैयार रहते हैं। इनके अलावा भारत के पास करीब 10 लाख रिजर्व फोर्स यानि अर्द्धसैनिक बल (बीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ, एसएसबी, आरएएफ आदि) के सैनिक हैं। दूसरी तरफ पाकिस्तान की बात करें तो पड़ोसी के पास करीब साढ़े छह लाख एक्टिव सैनिक हैं और करीब पांच लाख रिजर्व फोर्स है। यानि, पाकिस्तान के पास कुल करीब 11 लाख जवान हैं, जो भारत के मुकाबले अाधे हैं।

मिसाइल और परमाणु हथियार

  • दोनों देशों के पास परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम बैलिस्टिक मिसाइलें हैं।
  • भारत के पास नौ तरह की आपरेशनल मिसाइल है जिनमें 3000 से 5000 किमी मारक क्षमता वाली अग्नि मिसाइलें भी शामिल हैं।
  • चीन की मदद से पाकिस्तान ने भी कुछ मिसाइलें तैयार कर ली हैं। जो भारत के किसी भी हिस्से तक पहुंच सकती हैं। 2000 किमी मारक क्षमता वाली शाहीन 2 उसकी शीर्ष मिसाइल है।

पाक भी डरता है भारत के इन ब्रह्मास्त्र से

आइएनएस विक्रमादित्य एयरक्राफ्ट कैरियर

अत्याधुनिक आइएनएस विक्रमादित्य (INS Vikramaditya) एयरक्राफ्ट कैरियर, नवंबर 2013 में नौसेना में शामिल किये गए हैं। आइएनएस विक्रमादित्य को विशेष रूप से पाकिस्तानी नौसेना का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए डिजाइन किया गया है। इसे समुद्र में भारतीय आक्रमण का नेतृत्व करने के लिए शामिल किया गया है। पाकिस्तान के लिए ये किसी बुरे सपने की तरह है कि भारत आइएनएस विक्रमादित्य को पाकिस्तान के सबसे बड़े कराची बंदरगाह पर खड़ा कर दे। इससे उनकी नौसेना पूरी तरह से ब्लॉक हो जाएगी।

आइएनएस चक्र न्यूक्लियर अटैक सबमरीन

जहां एक तरफ आइएनएस विक्रमादित्य नौसेना की ताकत का समुद्र के ऊपर प्रदर्शन करता है, वहीं दूसरी तरफ भारत की असली ताकत समुद्री सतह के नीचे मौजूद आक्रमणकारी 14 पनडुब्बियां हैं। इन पनडुब्बियों में सबसे शक्तिशाली है आइएनएस चक्र सबमरीन, जो परमाणु हमला करने की भी क्षमता रखती है। अपने 11 युद्धपोत और आठ पनडुब्बियों के साथ आइएनएस चक्र विभिन्न प्रकार के युद्ध टास्क को पूरा करने में सक्षम है। इसलिए ये पाकिस्तानी नौसेना के लिए सबसे बड़ा खतरा है।

एएच-64 डी अपाचे लॉन्गबो ब्लॉक III अटैक हेलीकॉप्टर

एएच-64डी अपाचे हेलीकॉप्टर भारतीय थल सेना के लिए जमीनी लड़ाई में एक लंबी छलांग है। अपाचे हेलीकॉप्टर अपनी बख्तरबंद संरचना की वजह से पारंपरिक युद्ध या आतंकवाद विरोधी अभियानों के दौरान कुछ भी करने में सक्षम है। ये लड़ाई के दौरान सबसे कारगर हेलीकॉप्टरों में से एक है। पर्वतीय इलाकों में काफी ऊंचाई पर भी अपाचे 171 मील प्रति घंटे की गति से उड़ान भरने में सक्षम है। इसके रोटर ब्लेड 12.7एमएम मशीन गन का सामना कर सकते हैं। ये हेलीकॉप्टर दुश्मन पर हमला कर उसे नष्ट करने के लिए तैयार किया गया है।

SU-30MKI फाइटर जेट

भारतीय वायु सेना के SU-30MKI फाइटर जेट का उद्देश्य पाकिस्तानी वायु सेना में सेंध लगाना है। भारतीय वायु सेना के पास वर्तमान में 200 SU-30MKI फाइटर जेट विमान हैं और 72 नए विमानों के लिए ऑर्डर दिया जा चुका है। ये विमान लंबी क्षमता वाले डबल इंजन, शक्तिशाली रडार और घातक हथियार से लैस है। SU-30MKI फाइटर जेट, 1980 के दशक के SU-27MKI फाइटर जेट का अपग्रेटेड वर्जन है। ये विमान हवा में पैंतरेबाजी करने में माहिर है और ये एक ही वक्त पर कई लक्ष्यों को टारगेट कर सकता है।

भारत के सामने कितने दिन टिकेगा पाकिस्तान

अगर भारत ऐसे हथियार का इस्तेमाल करता है, जिसकी उम्मीद बिल्कुल नहीं है, यानि परमाणु हथियार की तो चंद मिनटों के अंदर ही पूरा पाकिस्तान बर्बाद हो जाएगा। युद्ध की स्थिति में आने वाले दशकों या सदियों तक भी पाकिस्तान अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो सकता। सैन्य लड़ाई की बात करें तो पाकिस्तान के पास आर्टिलरी की भी भारी कमी है और वह 15 दिन से ज्यादा भारत के सामने नहीं टिक पाएगा। जैसा कि हम जानते हैं, पाकिस्तान छद्म युद्ध यानि आतंकियों के जरिये तो भारत को परेशान करेगा, लेकिन आमने-सामने की जंग से बचने की हर संभव कोशिश भी करेगा। इसका सबसे बड़ा उदाहरण 1965, 1971 और 1999 की भारत-पाक जंग है।

भारत के पास राजनयिक विकल्प

भारत और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक संबंधों पर पिछले तीन वर्षों से बर्फ जमी हुई है। 2014 में सत्ता में आने के बाद अपने पहले दो वर्षों में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष नवाज शरीफ को भारत आमंत्रित किया, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच वार्ता फिर से शुरू की, लाहौर की औचक यात्रा की और पठानकोट में आतंकी हमले की साझा जांच की मंजूरी दी। जवाब में पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी की और उरी में सैन्य बेस कैंप पर हमला करवाया। मोदी और शरीफ द्वारा शांति पहल शुरू करने के लिए लाहौर में मुलाकात के कुछ दिनों बाद पठानकोट में भारतीय वायु सेना के अड्डे पर हुए हमले में छह सैनिक मारे गए।

भारतीय अधिकारियों ने पाकिस्तानी खुफिया विभाग के करीबी आतंकवादी समूह जैश-ए-मुहम्मद पर हमले का आरोप लगाया। जुलाई 2016 तक, दिल्ली का धैर्य समाप्त हो गया और कई मुद्दों पर उसकी स्थिति सख्त हो गई। पाकिस्तान में एक नई सरकार के बावजूद, पिछले साल संयुक्त राष्ट्र महासभा में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच बैठक रद हुई। हालांकि, सामान्य राजनयिक वार्ता जारी रही। गुरुवार को पुलवामा में हमले के बाद, भारत ने अपने कूटनीतिक प्रयासों को नए सिरे से इस मामले के खिलाफ बनाने की कोशिश की है। यह भारत की कूटनीतिक पहल का नतीजा ही है कि अमेरिका और अन्य देश भारत के साथ संयुक्त बयान में पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूहों का नाम लेते हैं।

भारत ने पाकिस्तान को अपने सहयोगियों की प्राथमिक सुरक्षा चुनौतियों से भी जोड़ा है। इस तरह के कदमों ने पाकिस्तान के बारे में भारत की चिंताओं के प्रति दूसरे देशों को संवेदनशील बनाया है, कई देशों ने पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूहों के खिलाफ खुफिया सहयोग की सुविधा दी है और कई देशों में उनके वित्तपोषण पर लगाम लगाई। भारत के सामने चुनौती यह है कि चीन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे पाकिस्तान से सहानुभूति रखने वाले देशों पर दबाव डालकर उसे अलग-थलग करे।

Posted By: Sanjay Pokhriyal

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