जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पराली जलाने का सिलसिला अगले हफ्ते से शुरू होने की आशंका है। बावजूद इसके इस साल पराली जलाने वाले राज्यों में पहले जैसी सख्ती दिखेगी, इसे लेकर संशय है क्योंकि चुनाव के चलते पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में राज्य सरकारें किसानों को हर तरीके से साधने में जुटी हैं। पराली के मुद्दे पर मुखर रहने वाले राजनीतिक दलों ने भी चुप्पी साध ली है। ऐसे में इन सभी राज्यों में इस साल पहले से ज्यादा पराली जलने की आशंका जताई जा रही है। ऐसा होता है तो दिल्ली की सांस फूलना तय है।

किसानों की नाखुशी का डर

खास बात यह है कि वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की दिल्ली और उसके पड़ोसी राज्यों के साथ हुई बैठक में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठ चुका है जिसमें विशेषज्ञों ने यह चिंता जाहिर की है। हालांकि अभी इन राज्यों के साथ मंत्री स्तरीय बैठक होना बाकी है। हर साल यह बैठक पराली जलाने का सीजन शुरू होने के पहले ही हो जाती थी, लेकिन इस बार अभी यह होना बाकी है। माना जा रहा है कि इस देरी के पीछे भी राज्यों का इस मुद्दे से बचने की कोशिश है, क्योंकि इससे उन्हें किसानों की नाखुशी का डर है। पर्यावरण मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, पराली जलाने का सीजन 20 सितंबर से 30 नवंबर तक रहता है। इसके कुछ ही महीनों बाद पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव हैं।

कोई भी राजनीतिक दल किसानों को छेड़ना नहीं चाहेगा

पराली जलाने की घटनाएं बढ़ने की आशंका इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि हाल में इन चुनावी राज्यों में किसानों पर पराली जलाने के दर्ज हुए मामलों को वापस ले लिया गया है। ऐसे में किसानों को लगने लगा है कि पराली जलाने पर उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी। वैसे भी देश में जिस तरह से किसानों का मुद्दा गर्म है, उसमें कोई भी राजनीतिक दल उन्हें छेड़ना नहीं चाहेगा। किसानों को खेतों को नई फसल की बोआई के लिए जल्द तैयार करने के लिए पराली जलाना सबसे आसान व किफायती तरीका लगता है।

ज्यादा पराली जलाने की घटनाएं पंजाब से

पराली जलाने की घटनाओं में पिछले साल ही ढील दिखने लगी थी। जिसके चलते अकेले पंजाब में वर्ष 2020-21 में वर्ष 2019-20 के मुकाबले करीब 44 फीसद ज्यादा पराली जलाने की घटनाएं रिपोर्ट की गई थीं। यह स्थिति तब है जब केंद्र सरकार पराली जलाने पर रोकथाम के लिए इन राज्यों में करीब 22 सौ करोड़ रुपये उपकरण और दूसरे संसाधन मुहैया कराने पर खर्च कर चुकी है।

Edited By: Sanjeev Tiwari