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ग्वालियर हादसे के बाद फिर उठा सवाल, जिम्मेदार पुलिसकर्मी बहाल हो गए लेकिन 13 महीने बाद भी जांच अधूरी

Published: Thu, 22 Oct 2026 08:06 AM (IST)

ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास नो-इंट्री में घुसे ट्रक से 15 लोगों की मौत के बाद एक बार ...और पढ़ें

ग्वालियर हादसे के बाद फिर उठा सवाल

ग्वालियर हादसे के बाद फिर उठा सवाल

HighLights

  1. बड़ा गणपति ट्रक हादसे में चार लोगों की हुई थी मौत, 15 से ज्यादा हुए थे घायल

  2. ग्वालियर हादसे के बाद फिर उठा सवाल- नो-इंट्री में ट्रक घुसने पर जिम्मेदारों की जवाबदेही कैसे तय होती है

जेएनएन, इंदौर। ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास नो-इंट्री में घुसे ट्रक से 15 लोगों की मौत के बाद एक बार फिर यह सवाल खड़ा हुआ है कि प्रतिबंधित मार्ग पर भारी वाहन के प्रवेश और उससे होने वाले जानलेवा हादसों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कितनी प्रभावी होती है।

इंदौर में भी 15 सितंबर 2025 को एयरपोर्ट रोड पर बेकाबू ट्रक ने कालानी नगर से बड़ा गणपति तक कई वाहन चालकों और राहगीरों को रौंद दिया था। हादसे में चार लोगों की मौत हुई थी और 15 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।

घटना के बाद सात पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया था, लेकिन हादसे के 13 महीने छह दिन बाद भी विभागीय जांच की स्थिति और उसके अंतिम नतीजे को लेकर सवाल बने हुए हैं।

जानकारी के अनुसार विभागीय जांच में बयान जारी है और 80 प्रतिशत पूरी हो चुकी है।15 सितंबर 2025 को एयरपोर्ट रोड पर एक बेकाबू ट्रक ने कालानी नगर से बड़ा गणपति की ओर जाते हुए रास्ते में वाहन चालकों और राहगीरों को टक्कर मारी थी।

करीब दो किलोमीटर के दायरे में ट्रक का तांडव चलता रहा। जो भी सामने आया, वह उसकी चपेट में आता गया। हादसे में चार बेगुनाह लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 15 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।

घटना के बाद पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई थी। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया था और पुलिस ने मौके पर पहुंचकर यातायात व्यवस्था संभाली थी। हादसे के बाद से ही शहर के प्रवेश मार्गों पर यातायात पुलिस और पुलिस ने सख्ती अपनाई हुई हैं।

जवानों और अधिकारियों की मौके पर तैनाती भी नजर आती हैं। भारी वाहनों का सुबह छह से रात 11 बजे तक नो-एंट्री है।

यातायात प्रबंधन पर उठे थे सवाल

हादसे के बाद यह सवाल उठा था कि प्रतिबंधित मार्ग पर भारी वाहन कैसे पहुंचा और उसे रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था क्यों नहीं थी? घटना के बाद तत्कालीन डीसीपी यातायात अरविंद तिवारी, एएसपी सुदेश सिंह सहित संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई।

सात पुलिसकर्मियों को निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद विभागीय जांच शुरू हुई, जिसका उद्देश्य घटना में पुलिसकर्मियों की भूमिका और संभावित चूक की पड़ताल करना था।

पूर्व डीसीपी धार में, एएसपी भोपाल में लाइन अटैच

विभाग से मिली जानकारी के अनुसार पूर्व डीसीपी यातायात अरविंद तिवारी का भोपाल स्थित पुलिस मुख्यालय तबादला हो गया था। वे वर्तमान में धार स्थित 34वीं बटालियन में कमांडेंट के पद पर कार्यरत हैं।

एएसपी सुदेश सिंह पुलिस मुख्यालय में लाइन अटैच हैं और उनकी बहाली नहीं हुई है। टीआई दीपक यादव, टीआई अर्जुन सिंह पंवार, प्रभारी एएसआई प्रेम सिंह, प्रभारी सूबेदार चंद्रेश मरावी और आरक्षक विजय चौहान, राहुल भदौरिया एवं देवेंद्र को बहाल कर दिया गया हैं। फिलहाल ये सभी लाइन अचैट हैं।

बयान जारी, 80 प्रतिशत जांच पूरी

हादसे के बाद से विभागीय जांच जारी है। संबंधित सात पुलिसकर्मियों के बयान लिए जा रहे हैं। जांच में सभी को उपस्थित होना आवश्यक है। 80 प्रतिशत जांच पूरी हो चुकी है। जांच पूरी होने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।- राजेश कुमार त्रिपाठी, ट्रैफिक डीसीपी एवं जांच अधिकारी