मुंबई [ओमप्रकाश तिवारी]। भीमा-कोरेगांव साजिश मामले में पुणे पुलिस द्वारा गिरफ्तार माओवादी विचारकों को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से कुछ समय के लिए भले राहत मिल गई हो, लेकिन महाराष्ट्र पुलिस के हाथ लगे उनके पत्र ही भविष्य में उन पर फंदा कसने के लिए पर्याप्त हैं। इन पत्रों से वाकई ऐसी साजिश का पर्दाफाश होता है, जिन्हें देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

पुणे पुलिस को ये पत्र गिरफ्तार ‘कॉमरेडों’ के पास से बरामद उनके लैपटॉप, हार्ड डिस्क एवं पेन ड्राइव इत्यादि को डी-कोड करने से प्राप्त हुए हैं। ऐसे ही एक पत्र में फरीदाबाद से गिरफ्तार की गईं सुधा भारद्वाज सेंट्रल कमेटी के कॉमरेड भारद्वाज को लिखती हैं – “बहुत पैसा खर्च हो रहा है। आपके बताए अनुसार जेएनयू एवं टिस्स के छात्रों को अंदरूनी हिस्सों में भेजने के लिए हमें आर्थिक सहायता की तुरंत आवश्यकता है”

सुधा आगे लिखती हैं – “प्रशांत की गिरफ्तारी के बाद मुझे पैसा मिलना बंद हो गया है। नागपुर की मीटिंग में सुरेंद्र रेड्डी ने पैसा देने से इंकार कर दिया। कॉमरेड प्रशांत द्वारा पीपीएस के काम के लिए नियुक्त किए गए कॉमरेड स्टेन स्वामी से भी मैंने बात की। लेकिन उन्होंने भी पैसा देने का कोई निश्चित वायदा नहीं किया”।

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बता दें कि कॉमरेड प्रकाश माओवादियों की सेंट्र्ल कमेटी में है। उसका असली नाम ऋतुपर्ण गोस्वामी है। वह असम में रहकर संगठन के महासचिव गणपति की ओर से बाकी कॉमरेडों से बात करने की जिम्मेदारी संभालता है।

जून में दिल्ली से गिरफ्तार रोना विल्सन 18 अप्रैल, 2017 के अपने पत्र में कॉमरेड प्रकाश को लिखता है कि “नेपाल और मणिपुर से हथियार का इंतजाम करने की बात कही है। हमारे कॉमरेड बड़ी संख्या में मारे जा रहे हैं। ग्राउंड पर तैयार हथियारों की जरूरत है। इसके बारे में वीवी (वरवर राव) अधीकृत हैं। सुरेंद्र गडलिंग और वीवी दोनों दुश्मन ताकतों पर बड़े हमले के पक्षधर हैं।

रोना इसी पत्र में आठ करोड़ रुपए हथियारों के लिए प्राप्त करने की बात कहता दिखता है। जिससे ग्रेनेड लॉन्चर, मशीन गनें एवं चार लाख गोलियां खरीदी जानी हैं”। रोना विल्सन के इसी पत्र से पता चलता है कि हथियारों की खरीद और सौदेबाजी के लिए संगठन में वरवर राव अधीकृत हैं, और वह दुश्मन ताकतों अर्थात सरकारी सुरक्षा बलों पर बड़े हमलों के पक्षधर भी हैं।

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पुलिस को मिले पत्रों में से ही एक में पैसे के लेनदेन को लेकर नक्सलियों में उपजनेवाले आपसी अविश्वास का भी पता चलता है। एक पत्र में वरवर राव सुरेंद्र गडलिंग को लिखता है – “आप इस बारे में किए गए विश्वास को बनाए रखने में नाकाम रहे हैं। जिससे हमारे शहरी कैडर में टूट का खतरा महसूस हो रहा है। आपको इसके लिए नोटबंदी के दौरान लाखों रुपए फंडिंग दी जा चुकी है। हम गढ़चिरौली और बस्तर में, जितना फंड उपलब्ध कराना था, वह नहीं कर सके। इन बातों को लेकर संगठन में आपको लेकर नाराजगी का वातावरण है”।

बता दें कि वरवर राव ने पैसे को लेकर यह शिकायत सेंट्रल कमेटी को भी भेजी थी। जिसको जवाब देते हुए सुरेंद्र गडलिंग लिखता है – “मैं आपको बताना चाहता हूँ कि नोटबंदी की वजह से सड़क और रेलमार्ग पर की जा रही चेकिंग के कारण हम गढ़चिरौली और छत्तीसगढ़ के कामरेडों को समय पर फंड उपलब्ध नहीं करा सके। इसमें मेरा कोई गलत इरादा नहीं था। अब पिछले सात-आठ दिनों में मैंने उन्हें फंडिंग भेजना शुरू कर दिया है”।

इसी पत्र में गडलिंग छत्तीसगढ़ के कुछ स्थानों का नाम लेते हुए वहां दुश्मन फोर्स की तैनाती कम होने का इशारा करता है। पुलिस सूत्रों के अनुसार 17 मार्च, 2017 को किए गए उसके इस इशारे के बाद ही उन स्थानों पर बड़े नक्सली हमले हुए हैं।

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सेंट्रल कमेटी के एक और सदस्य मिलिंद तेलतुंबड़े भी एक पत्र में वीवी राव के आदेश पर महाराष्ट्र में बड़े नक्सली हमले होने और 80 वाहन जलाए जाने की बात लिखता है। मिलिंद भीमा-कोरेगांव की हिंसा के ठीक एक दिन बाद, यानी 2 जनवरी, 2018 को लिखे अपने पत्र में भीमा-कोरेगांव की सफलता का जिक्र करते हुए ब्राह्मण विरोधी भावनाओं को और भड़काए जाने की जरूरत पर बल देता है।

मार्च में लिखे गए ऐसे ही एक पत्र में भीमा-कोरेगांव की आग धीमी पड़ने की बात कही गई है, तथा इसे भड़का कर भाजपाशासित राज्यों में अस्थिरता पैदा करने की जरूरत बताई गई है। चूंकि इन पत्रों के जरिए हैदराबाद से गिरफ्तार वरवर राव की भूमिका हथियारों की खरीद-फरोख्त में सामने आ रही है। इसलिए महाराष्ट्र पुलिस के अतिरिक्त महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) परमवीर सिंह का मानना है कि उसकी हिरासत और पूछताछ से पुलिस को नक्सल आंदोलन से जुड़े कई बड़े राजों का खुलासा हो सकता है।  

Posted By: Vikas Jangra