लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे बनाने वाली कंपनी पर तीन साल का बैन, जानिए पीएनसी इन्फ्राटेक पर क्यों हुआ एक्शन
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे में खामियों के कारण पीएनसी इन्फ्राटेक को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने तीन साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया है।

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे बनाने वाली कंपनी पर तीन साल का बैन।
HighLights
पीएनसी इन्फ्राटेक पर लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की खामियों के कारण प्रतिबंध।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने कंपनी को तीन साल के लिए किया बैन।
कंपनी अब NHAI के किसी भी नए टेंडर में भाग नहीं ले सकेगी।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण में तरह-तरह खामियां सामने आने के बाद से विवादों और सवालों में घिरी निर्माणदायी कंपनी पीएनसी इन्फ्राटेक पर अब बड़ी कार्रवाई की गई है।
पांच अगस्त 2026 से नॉन परफॉर्मर घोषित करने के लिए कंपनी को कारण बताओ नोटिस दिया गया था और अब भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण पर तीन साल का प्रतिबंध लगा दिया है। प्रतिबंध की इस अवधि में कंपनी एनएचएआई या संबंधित किसी भी एजेंसी की निविदा प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सकेगी।
लखनऊ से कानपुर तक 63 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे का निर्माण हाइब्रिड एन्युटी मॉडल के तहत आगरा निवासी भाजपा के राज्य सभा सदस्य नवीन जैन के परिवार की कंपनी पीएनसी इन्फ्राटेक ने कराया। 13 जुलाई को इसका लोकार्पण हुआ और 12-13 दिन बाद पहली बारिश में ही निर्माण कार्य की गुणवत्ता की पोल गई।
कई जगह एक्सप्रेसवे की सड़क धंस गई। तब कंपनी को नॉन परफार्मर घोषित करने के लिए कारण बताओ नोटिस देने के साथ ही निर्माण से संबंधित एनएचएआई के इंजीनियरों व कंसल्टेंट आदि पर कार्रवाई की गई। तब से नोटिस पर जवाब और सुनवाई की प्रक्रिया चल रही थी।

पीएनसी द्वारा 14 सितंबर 2026 को सेबी रेगुलेशन के तहत बीएसई और एनएसई को सूचना दी कि एनएचएआई ने 11 सितंबर 2026 को उसकी सहयोगी कंपनी अवध एक्सप्रेसवे प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिबंध को पीएनसी इन्फ्राटेक तक विस्तारित करते हुए तीन साल का प्रतिबंध लगा दिया है।
उल्लेखनीय है कि इस कार्रवाई से पीएनसी के शेयरों में मंगलवार को 20 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि कंपनी की ओर से कहा गया है कि इस कार्रवाई का उसके मौजूदा प्रोजेक्ट पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन भविष्य में नए टेंडर लेने में उसकी तकनीकी क्षमता रेटिंग कम हो जाने के कारण जरूर प्रभावित होगी। वह इस आदेश के विरुद्ध कानूनी विकल्पों पर भी विचार कर रही है।
अभी और पड़ सकती है वित्तीय मार
शुरुआत में कंपनी को कारण बताओ नोटिस और इंजीनियरों पर कार्रवाई के साथ ही एनएचएआई ने पूरे एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली पर रोक लगाने का भी निर्णय लिया।
बताया जाता है कि इसके कारण अनुमानित प्रतिदिन 42 लाख रुपये प्रतिदिन के हिसाब से टोल शुल्क की भरपाई कंपनी द्वारा एनएचएआई को की जाएगी। निर्माण कार्य की जांच के लिए भी प्राधिकरण ने आईआईटी खड़गपुर की टीम को जिम्मा सौंपा था। विशेषज्ञों ने जांच रिपोर्ट तैयार कर एनएचएआई को सौंप दी है।
प्राधिकरण के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अभी तक सड़क धंसने, दरारें पड़ने, एलिवेटेड रोड के स्लैब से सीमेंट गिरने जैसी खामियां सामने आ चुकी हैं। इसी आधार पर सुनवाई आदि की प्रक्रिया पूरी होने के बाद तीन साल के प्रतिबंध की कार्रवाई की गई है।
उन्होंने दावा किया कि अभी जांच रिपोर्ट के निष्कर्ष सामने आने के बाद तकनीकी विशेषज्ञ बताएंगे कि एक्सप्रेसवे की री-सरफेसिंग की आवश्यकता पड़ेगी या मरम्मत से ही काम चल जाएगा।
हालांकि, मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया कि विशेषज्ञों ने मौखिक रूप से यही बताया है कि री-सरफेसिंग करनी पड़ेगी। यह काम कंपनी को अपने खर्च से ही करना पड़ेगा, जिससे बड़ा वित्तीय भार पड़ना तय है।
