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पीएम-सेतु योजना से बदलेगी ITI की तस्वीर, कौशल विकास और रोजगार के असर पर रिपोर्ट तैयार करेगी सरकार

Published: Thu, 01 Oct 2026 11:21 PM (IST)

पीएम-सेतु योजना के तहत सरकार देश में कौशल विकास को वैश्विक मानकों तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रही है।

पीएम-सेतु योजना से कौशल विकास में क्रांति

पीएम-सेतु योजना से कौशल विकास में क्रांति

HighLights

  1. पीएम-सेतु योजना से कौशल विकास को मिलेगा नया आयाम।

  2. एक हजार आईटीआई के कायाकल्प के लिए 60 हजार करोड़ आवंटित।

  3. डीजीटी योजना के प्रभाव का आकलन करने को करेगा सर्वेक्षण।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। भारत में कौशल विकास को वैश्विक मानकों तक पहुंचाने के लिए कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय अब तक कई प्रयास कर चुकी है। इस दिशा में सफलता तो मिली है, लेकिन अपेक्षा के अनुरूप नहीं।

अब केंद्र सरकार को विश्वास है कि तकनीकी दक्षता और उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप कौशल विकास के मामले में जो खाई अब तक बनी रह गई है, वह पीएम-सेतु (प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लायबिलिटी ट्रांसफार्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आइटीआइ) से पट जाएगी।

खास बात यह है कि अपने इस दावे को परिणामजनक बनाने और पुष्ट करने के लिए प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी) सर्वे भी शुरू कराने जा रहा है, ताकि योजना से औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आइटीआइ) के कायाकल्प, आधुनिक प्रयोगशालाओं के निर्माण, प्रशिक्षित अभ्यर्थियों व प्रशिक्षकों के संतुष्टि का स्तर और रोजगार के रूप में सफलता के आंकड़ों पर तुलनात्मक रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

पीएम-सेतु योजना के तहत पहले चरण में देशभर की एक हजार आईटीआई के कायाकल्प का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए केंद्र सरकार ने 60 हजार करोड़ रुपये का आवंटन किया है। इसमें राज्यों के साथ-साथ उद्योगों को भी जोड़ा गया है। अब तक 12 राज्यों के लिए तीनों अंशधारकों के माध्यम से वित्त पोषण के लिए स्पेशल इन्वेस्टमेंट प्लान को स्वीकृति मिल चुकी है। यह राज्य आंध्र प्रदेश, असम, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, तेलंगाना, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल हैं।

डीजीटी ने एजेंसियों से सर्वे के लिए प्रस्ताव मांगे तो देश-विदेश की कई बड़ी कंपनियों ने निविदा में रुचि दिखाई है। इनमें से जिसका भी चयन होगा, उसे इन राज्यों की 650 सहित ऐसी सरकारी और निजी आईटीआई का भी बेसलाइन सर्वे करना होगा, जो इस योजना में शामिल नहीं हैं। उ

द्देश्य यह पता लगाना है कि पीएम-सेतु लागू होने से पहले इनकी क्या स्थिति है? प्रयोगशालाएं कैसी हैं? इन्फ्रास्ट्रक्चर से प्रशिक्षक कितने संतुष्ट हैं? प्रशिक्षण के स्तर से प्रशिक्षणार्थियों ने क्या महसूस किया? प्रति आईटीआई से पासआउट का रोजगार में क्या परिणाम रहा? क्षेत्र के उद्योगों से भी फीडबैक लिया जाएगा कि अब प्रशिक्षणर्थी उनके लिए कितने उपयोगी बन पाए हैं? फिर इन आंकड़ों की तुलना योजना लागू होने के बाद के सर्वेक्षण परिणामों से करते हुए रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

हालांकि, प्रशिक्षण महानिदेशक दिलीप कुमार आश्वस्त हैं कि इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार की जो आवश्यकता है, वह पीएम-सेतु से पूरी होगी। उद्योगों की भागीदारी और आधुनिक प्रयोगशालाएं बनने से निश्चित ही भारत के युवा भी वैश्विक मानकों का कौशल प्राप्त कर सकेंगे।