यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 06, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
पीएम मोदी बोले, महिलाएं खुद सशक्त; पुरुष होते कौन हैं जो सशक्त करेंगे
दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित महिला जनप्रतिनिधिओं के राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन समारोेह में आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ...और पढ़ें

नई दिल्ली। दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित महिला जनप्रतिनिधिओं के राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन समारोेह में आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि महलाएं खुद सशक्त हैं, पुरुष होते कौन हैं जो महिलाओं को सशक्त करेंगे।
मोदी ने कहा कि बजट और बुनियादी ढांचे केवल राष्ट्र को मजबूत नहीं बनाते, बल्कि देश का हर नागरिक राष्ट्र को मजबूत बनाता है और मां नागरिक को मजबूती देती है। उनके मुताबिक, कई काम एक साथ करने के मामले में महिलाओं के साथ बराबरी नहीं की जा सकती है। यही नारी शक्ति हैं और हमें उन पर गर्व है।
उन्होंने लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन का इस तरह के कार्यक्रम के लिए शुक्रिया किया। इस दौरान पीएम ने सुषमा स्वराज की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि हमारे देश में बहुत से विदेश मंत्री हुए, लेकिन सुषमा स्वराज ने जो किया इसके पूर्व वैसा किसी ने नहीं किया था।
पीएम ने कहा कि महिलाओं को अवसर कम मिल पाते हैं, लेकिन उसके नतीजे बहुत अच्छे आते हैं। अवसर बहुत कम मिलते हैं, लेकिन हर क्षेत्र में इनका योगदान है। तकनीक की बहुत बड़ी भूमिका व्यक्ति के जीवन में सुनिश्चित हो चुकी, इस तकनीक के उपयोग में महिलाएं माहिर हैं।
देश भर की महिला प्रतिनिधियों के लिए एक अलग से ई-प्लेटफॉर्म बनाया जाए। महिलाओं में टेक्नोलॉजी अडॉप्ट करने वाली क्षमता है, टेक्नोलॉजी में महिलाएं पीछे नहीं हैं, मॉडर्न से मॉडर्न उपकरणों का उपयोग किचन में महिलाएं करती हैं। चाहे जितने आर्किटेक्ट घर का नक्शा बना दें लेकिन आखिर में घर की महिला तय करती है कि कहां क्या बनेगा, महिलाओं की यही भूमिका राष्ट्र के लिए भी अपेक्षित है।
मोदी ने कहा कि महिला जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र में आम लोगों के बीच अपनी सशक्त छवि और विशिष्ट पहचान बनाएं। महिला जनप्रतिनिधि तकनीकी का विकास जनसंपर्क में करें। मेरी अपील है कि सभी सांसद महिला जनप्रतिनिधियों से जरूर मुलाकात करें, उनसे परिचय बढ़ाएं। महिला विकास से महिलाओं के नेतृत्व में विकास के दिन ज्यादा दूर नहीं हैं।
पीएम ने कहा कि जो सशक्त हैं, उनका सशक्तिकरण कौन करेगा। पुरुष होते कौन हैं जो सशक्त करेंगे। इस मौके पर पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल व सुमित्रा महाजन भी मौजूद थीं।
शनिवार को इस सम्मेलन में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा था कि प्रधानमंत्री जो कहते हैं, वह करते हैं। यह बयान इसलिए अहम है, क्योंकि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के निशाने पर सीधे प्रधानमंत्री और उनके कामकाज का तौर-तरीका ही रहा है। पिछले दिनों लोकसभा में भी कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री की कार्यशैली पर जोरदार हमला किया था।
राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री को एक प्रतिबद्ध आदमी बताया। उद्घाटन समारोह में मोदी की उपस्थिति की प्रशंसा करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि कार्यक्रम में उनकी कोई सक्रिय भूमिका नहीं है। उन्हें कुछ बोलना भी नहीं है। फिर भी वह एक घंटे से बैठे हैं। एक प्रधानमंत्री के लिए यह बहुत मुश्किल काम है। यह उनकी प्रतिबद्धता दिखाता है और बताता है कि वह जो कहते हैैं, वह करते भी हैं।
राष्ट्रपति ने मोदी की इस बात के लिए तारीफ की कि उन्होंने सत्ता में आने के बाद 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा दिया और इस दिशा में पहल भी की। प्रणब ने कहा कि यह सही अर्थों में महिलाओं के सशक्तीकरण के प्रति सरकार के समर्पण को दिखाता है।
महिला आरक्षण विधेयक पास नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण
संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने के लिए संसद से विधेयक पास कराने में विफलता को राष्ट्रपति ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से इसे पारित कराने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया। प्रणब ने कहा कि यह उनका दायित्व है। राष्ट्रपति ने इस बिल को नारी सशक्तीकरण और समानता के अधिकार के लिए जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि भारत की आबादी का 50 फीसद हिस्सा महिलाओं का है। लेकिन आज भी हम संसद में उन्हें 12 फीसद से अधिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित नहीं कर पाए हैं। उल्लेखनीय है कि लोकसभा से दो तिहाई बहुमत से पारित होने के बाद भी यह विधेयक राज्यसभा में पारित नहीं हो सका है।
राष्ट्रपति ने कहा कि पंचायतों और स्थानीय निकायों में 12.70 लाख निर्वाचित महिला प्रतिनिधि हैं। वे काफी अच्छा काम कर रही हैं। कई राज्यों की पंचायतों में महिलाओं को 50 फीसद आरक्षण दे दिया गया है और कई राज्य इस दिशा में प्रयास कर रहे हैं।
अंसारी ने दिया ज्यादा टिकट देने का सुझाव
उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने आरक्षण बिल पारित होने तक राजनीतिक दलों को स्वेच्छा से महिलाओं को ज्यादा टिकट देने का सुझाव दिया। पिछले लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए अंसारी ने कहा कि राष्ट्रीय पार्टियों ने सिर्फ 146 महिलाओं को मैदान में उतारा था। उन्होंने कहा कि संसद में महिलाओं की संख्या केवल 12 फीसद है। यह बहुत ही कम है। यह महिला आरक्षण विधेयक पास कराने से ही ठीक हो सकता है।
राजनाथ सिंह ने किया ट्वीट
आज नई दिल्ली में 2,030 विकास एजेंडा के समर्थन में कानून के नियम पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र में भाग लिया। 2030 एजेंडा की जटिलता और गंभीरता को देखते हुए, विकास की दिशा में पूरे विश्व को उत्तरदायी, अभिनव और समावेशी दृष्टिकोण रखने की जरूरत है। सतत विकास कानून के शासन के बिना संभव नहीं है। शांति और सद्भाव सतत विकास के लिए आवश्यक हैं। सतत विकास की बहस को आगे ले जाने के लिए हमें युवाओं के साथ संवाद करने की जरूरत है।
खास बातें
-इस सम्मेलन का आयोजन लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन द्वारा किया जा रहा है।
-इसका उद्देश्य देशभर की निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों को एक-दूसरे से संवाद का अवसर मुहैया कराना है।
-कार्यक्रम के एक सत्र की अध्यक्षता बांग्लादेश की स्पीकर शिरीन चौधरी करेंगी।
-समापन सत्र को पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल संबोधित करेंगी।
