लखनऊ (अनवीश त्यागी)। देश की सबसे बड़ी पंचायत के मुखिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब ग्राम और क्षेत्र पंचायतों के प्रतिनिधियों से सीधे संवाद स्थापित करेंगे। पीएमओ के निर्देश पर करीब आठ लाख पंचायत प्रतिनिधियों से संपर्क साधने के लिए नाम, पते व टेलीफोन नंबरों की सूची (टेलीफोनिक ब्यौरा) जुटाने में पंचायती राज विभाग हलकान है। मसला चूंकि पीएमओ से जुड़ा है, इसलिए विभाग से न उगलते बन रहा है और न ही निगलते।

प्रधानमंत्री का पंचायत प्रतिनिधियों से हैलो करना एक अभिनव प्रशासनिक प्रयोग बताया जा रहा है। इस प्रयोग से नरेंद्र मोदी अपना संदेश देने के अलावा पंचायतों की समस्याएं भी जानेंगे। सीधा संवाद करके केंद्रीय योजनाओं की जमीनी हकीकत का पता लगाएंगे। खासतौर से निर्मल भारत (स्वच्छता) अभियान पर फोकस रहने की उम्मीद जताई जा रही है। यह पहला मौका होगा, जब प्रधानमंत्री कार्यालय पंचायतों से सीधा संवाद करेगा। पंचायतीराज संगठन के पूर्व सचिव विनय सिंह के अनुसार पहल सराहनीय है। केंद्र की योजनाओं का शीर्ष स्तर से फालोअप बेहद जरूरी है

मोदी के इस 'हैलो अभियान' का मकसद भले ही प्रशासनिक बताया जाए परन्तु इसके सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं। प्रदेश में नवंबर 2015 तक त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव प्रस्तावित हैं। अमूमन पंचायतों में भाजपा की पकड़ को कमजोर माना जाता रहा है परंतु लोकसभा चुनाव में जिस तरह ग्रामीण क्षेत्रों में मोदी का जादू सिर चढ़ कर बोला, उसे बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है। इस दिशा में भाजपा के स्तर से अभी गंभीर कार्यक्त्रम नहीं चल पाया है। जानकारों का मानना है कि मोदी का यह अभियान पंचायत चुनाव में भाजपा के लिए वरदान साबित हो सकता है। लोकसभा चुनाव से पहले लौहसं‌र्ग्रह अभियान के बहाने मोदी यह प्रयोग कर चुके हैं जो कि काफी सफल भी रहा था।

उल्लेखनीय है कि प्रदेश में कुल 51914 ग्राम प्रधान और सात लाख 72 हजार ग्राम पंचायत सदस्य व 821 ब्लाक प्रमुख एवं 64 हजार क्षेत्र पंचायत सदस्यों के अलावा 2660 जिला पंचायत सदस्य हैं।

कल से तैयार होगी पंचायत वार्डो की सूची

ग्राम, क्षेत्र व जिला पंचायतों के प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों (वार्डो) की प्रस्तावित सूचियां तैयार कर प्रकाशन का कार्य एक से 15 अगस्त तक पूरा किया जाएगा। प्रमुख सचिव पंचायती राज चंचल कुमार तिवारी ने हिदायत दी है कि एक परिवार के सभी सदस्यों को एक ही वार्ड में रखना जरूरी है। इसके अलावा प्रत्येक क्षेत्र पंचायत वार्ड की जनसंख्या कम से कम दो हजार होनी चाहिए, वहीं जिला पंचायत वार्ड का गठन पचास हजार की आबादी पर होगा। किसी भी क्षेत्र पंचायत वार्ड को दो क्षेत्रों में विभक्त नहीं किया जा सकेगा।

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