'क्या हमें 4th पार्टी के ऑडिट की जरूरत है', सार्वजनिक परियोजनाओं को लेकर पीएम मोदी की सचिवों को फटकार
प्रधानमंत्री मोदी ने 30,000 करोड़ रुपये से अधिक के छह इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की और गुणवत्ता व गति से कोई समझौता न करने पर जोर दिया।

पीएम मोदी ने की रिव्यू मीटिंग। (फोटो- पीटीआई।)
HighLights
पीएम मोदी ने सार्वजनिक परियोजनाओं की गुणवत्ता पर चिंता जताई।
चौथी पार्टी ऑडिट की आवश्यकता पर सवाल उठाया गया।
छह इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की गई।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। निर्माण और सार्वजनिक प्रोजेक्ट्स में क्वालिटी से जुड़ी समस्याओं की खबरों पर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र के सचिवों और राज्यों के मुख्य सचिवों से यह सवाल पूछा कि क्या अब हमें चौथी पार्टी से ऑडिट कराने की जरूरत है?
उन्होंने कहा कि हालांकि काम की क्वालिटी का थर्ड-पार्टी ऑडिट एक आम बात है, लेकिन हो सकता है कि यह उम्मीद के मुताबिक काम न कर रहा हो। मंगलवार को मासिक प्रगति बैठक की अध्यक्षता करते हुए पीएम मोदी ने वरिष्ठ नौकरशाहों से कहा कि ऐसी बातें मंजूर नहीं हैं और सिस्टम इस तरह काम नहीं करेगा।
पीएम मोदी ने की 6 प्रोजेक्ट्स की समीक्षा
प्रधानमंत्री मोदी ने रेलवे, सड़क और बिजली सेक्टर के छह इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की। ये प्रोजेक्ट्स नौ राज्यों में फैले हैं और इनकी कुल लागत 30,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है। उन्होंने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को अलग-अलग हिस्सों या पैकेज के तौर पर देखने के बजाय एक इंटीग्रेटेड सिस्टम के तौर पर देखा और मॉनिटर किया जाना चाहिए।
'काम की रफ्तार और क्वालिटी से न हो कोई समझौता'
पीएमओ ने एक आधिकारिक बयान में कहा, "प्रधानमंत्री ने कहा कि काम करने की रफ्तार के साथ-साथ क्वालिटी से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने मंत्रालयों, राज्यों और काम को लागू करने वाली एजेंसियों से कहा कि वे आधुनिक टेक्नोलॉजी अपनाएं और हर स्तर पर क्वालिटी की गारंटी और निगरानी को मजबूत करें।"
इसके अलावा, पावर सेक्टर से जुड़े एक प्रोजेक्ट की समीक्षा करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि सिर्फ बिजली का उत्पादन बढ़ाना काफी नहीं है जब तक कि उसके लिए जरूरी ट्रांसमिशन क्षमता न हो। ठीक वैसे ही जैसे नहरें बनाए बिना बांध बनाना मनचाहा नतीजा नहीं देता।
