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ब्रिक्स के मंच से पीएम मोदी का दक्षिण वाला दांव, परिसीमन पर सुगबुगाहट फिर तेज

Published: Sun, 13 Sep 2026 09:17 PM (IST)Updated: Sun, 13 Sep 2026 09:29 PM (IST)

ब्रिक्स सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दक्षिण भारतीय संस्कृति के प्रदर्शन को परिसीमन बिल से जोड़ा जा रहा है।

ब्रिक्स के मंच से पीएम मोदी का दक्षिण वाला दांव। (X- @BJP4India)

ब्रिक्स के मंच से पीएम मोदी का दक्षिण वाला दांव। (X- @BJP4India)

HighLights

  1. पीएम मोदी ने ब्रिक्स में तमिल संस्कृति और आस्था का प्रदर्शन किया।

  2. परिसीमन बिल पर विपक्ष को सरकार की मंशा पर गहरी आशंका।

  3. दक्षिणी राज्यों की लोकसभा सीटों पर संभावित असर की चिंता।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। मोदी सरकार इसी साल संसद के विशेष सत्र में परिसीमन बिल लेकर आई थी, जो कि लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत के अभाव में गिर गया। फिर अटकलें चलती रहीं कि सरकार मानसून सत्र में इसे ला सकती है।

यह बिल तब भी नहीं आया और अभी भी सरकार की ओर से ऐसा कोई दावा नहीं किया गया, लेकिन विपक्ष ने इसे दक्षिण की राजनीति से इस तरह जोड़ दिया है कि दक्षिणी राज्य से कोई जुड़ा कोई संदर्भ आते ही परिसीमन चर्चा में आ जाता है।

ब्रिक्स के मंच से रामनाथस्वामी मंदिर के प्रति दिखाई आस्था

अब जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स सम्मेलन के मंच से तमिल ग्रंथ तिरुक्कुल और रामेश्वरम स्थित रामनाथस्वामी मंदिर के प्रति अपनी आस्था दिखाई, उसे फिर पीएम के दक्षिण वाले दांव से जोड़कर देखा जा रहा है और परिसीमन का कौतुहल फिर राजनीतिक हलकों में है।

पीएम ने ब्रिक्स सम्मेलन में आए रूस के प्रधानमंत्री व्लादिमीर पुतिन को तिरुक्कुल के रूसी अनुवाद भेंट किया। वहीं, सभी विदेशी मेहमानों के स्वागत मंच के पाश्र्व में रामनाथस्वामी मंदिर की प्रतिकृति थी। इसने देश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी।

परिसीमन बिल को लेकर विपक्ष आशंकित

दरअसल, विपक्ष आशंकित है कि सरकार मानसून सत्र में भले ही परिसीमन बिल नहीं ला सकी, लेकिन वह दो-तिहाई बहुमत जुटाने के प्रयास में लगी है और कभी भी मानसून सत्र की विस्तारित बैठक बुला सकती है, इसलिए सत्र के स्थगन की विधायी प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं की गई है। इस लेकर कांग्रेस सांसद जयराम रमेश सवाल उठा भी चुके हैं।

परिसीमन को लेकर दक्षिण भारत के राज्यों में सरगर्मी तेज

इधर, परिसीमन को लेकर दक्षिण भारत के प्रमुख राज्य तमिलनाडु में राजनीतिक सरगर्मी चल भी रही है। दरअसल, विशेष सत्र के तमिलनाडु के चुनाव से पहले था। तब विपक्ष ने इसे मुद्दे को दक्षिण के साथ भेदभाव बताया कि परिसीमन बिल पास होने के बाद दक्षिणी राज्यों की लोकसभा सीटों की संख्या उत्तर भारत या कहें कि हिंदी पट्टी के राज्यों की तुलना में घट जाएंगी।

तब क्षेत्रीय भावनाओं के अनुरूप डीएमके ने बिल का विरोध किया, लेकिन मानसून सत्र के दौरान उसका रुख नरम दिखाई दिया।

डीएमके कर सकती है बिल का समर्थन

अटकलें लगने लगीं कि डीएमके चूंकि कांग्रेस से भी नाराज है तो इस बिल पर समर्थन कर सकता है। हालांकि, उसके बाद तमिलनाडु विधानसभा में टीवीके सरकार ने जब परिसीमन बिल के विरोध में प्रस्ताव पारित किया तो डीएमके ने स्थानीय राजनीतिक आवश्यकता को देखते हुए प्रस्ताव का समर्थन किया।

फिर पिछले दिनों सीएम विजय दिल्ली आए तो बयान दिया कि वह परिसीमन विधेयक पर विचार करेंगे। भले ही लोकसभा में उनके दल की एक भी सीट नहीं है, लेकिन राजनीतिक संदेश जरूर दे दिया। इसके कारण भी कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों की आशंका बढ़ गई है कि मोदी का यह ''साउथ शो'' उसी तैयारी की एक कड़ी तो नहीं।