पीएम मोदी की सोने, तेल और विदेश यात्रा पर रोक की अपील: संकट या रणनीति
PM मोदी ने देशवासियों से एक साल तक सोना न खरीदने, तेल-गैस का उपयोग सीमित करने और विदेश यात्रा से ...और पढ़ें

संकट का संकेत या कोई बड़ी रणनीति?
HighLights
PM मोदी की अपील: सोना, तेल, विदेश यात्रा पर ब्रेक।
आयात घटाकर अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की रणनीति।
पश्चिम एशिया संकट के प्रभाव को सीमित करने का प्रयास।
जागरण नेटवर्क, नई दिल्ली। सोने पर खर्च किया गया हमारा हर एक रुपया देश से बाहर चला जाता है और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का करीब 90 प्रतिशत सोना आयात करता है, जिसका भुगतान डॉलर में होता है।
एक तरह से हम सोना खरीद कर डॉलर को मजबूत करते हैं और इस प्रक्रिया में अपना रुपया कमजोर होता है। निर्यात की तुलना में अधिक आयात चालू खाता घाटे को बढ़ाता है, जो किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा नहीं माना जाता है। ऐसा ही तेल और गैस के मामले में भी है।
सामान्य हालात में सोने का आयात देश पर उतना भारी नहीं पड़ता, लेकिन पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष की वजह से तेल कीमतों में उछाल और ऊर्जा संकट ने हालात को असामान्य बना दिया है। हमारा आयात बिल तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से एक साल तक सोना न खरीदने, तेल और गैस का उपयोग सीमित करने, विदेश यात्राओं से परहेज करने की अपील की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पीएम की अपील किसी संकट का संकेत नहीं, बल्कि बाहरी संकट से देश के हितों से सुरक्षित रखने की बडी रणनीति का हिस्सा है।
ऐसा करके हम न सिर्फ पश्चिम एशिया संकट के प्रभाव को सीमित कर सकते हैं, बल्कि इन मदों में खर्च में कटौती करने से होने वाली बचत को आप निवेश या अन्य उत्पादक गतिविधियों में लगा सकते हैं, जो मांग और आपूर्ति के चक्र को तेज करते हुए अर्थव्ययवस्था को रफ्तार देगा। ऐसे में खास उत्पादों पर खर्च में कटौती की रणनीति और इससे देश पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव की पड़ताल प्रासंगिक हो जाती है...

भारत की तैयारी कैसी है?
पश्चिम एशिया संकट के बावजूद भारत ने कई अन्य आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में खुद को अधिक मजबूत स्थिति में रखा है। इसके पीछे भारत की विशाल रिफाइनिंग क्षमता, कच्चे तेल के स्रोतों का विविधीकरण और सोना जैसे गैर जरूरी आयात को नियंत्रित करने की नीतिगत लचीलापन जैसे महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच हैं। - अजय श्रीवास्तव, संस्थापक, ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिएटिव
सोने की खरीदारी क्यों बढ़ी?
सोने की खरीदारी को लेकर समग्र विकास एक्सपर्ट डॉ. विकास सिंह कहते हैं -
भारत में सोने की दीवानगी के पीछे वित्तीय प्रणाली पर एक गहरा अविश्वास छिपा है। इसी वजह से लोग सोना खरीद कर घर में या लाकर में रखते हैं। उनको लगता है कि भविष्य में संकट आने पर वह कभी भी सोने को बेच कर अपनी जरूरतें पूरी कर सकते हैं। यह उनको आर्थिक सुरक्षा देता है।
लोगों का क्या कहना है?
मुन्ना स्वर्णकार कहते हैं कि आज दुनिया सहित हमारा देश भारत भी ईरान-अमेरिका युद्ध से उपजे कठिन हालात के दौर से गुजर रहा है। सरकार संभावित ऊर्जा संकट और विदेशी मुद्रा बचाने वाले अन्य दीर्घाकलिक उपायों को अपने रणनीतिक एजेंडे मे मुख्य रूप से शामिल करना चाहती है।
देशवाासियों को हर उस चीज की हरसंभव कम खरीदारी और उपभोग करना चाहिए, जो आयात होता है। इससे न सिर्फ उनका पैसा बचेगा बल्कि आयात में कमी की वजह से विदेशी मुद्रा कम खर्च होगी और हमारा विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होगा। भू-राजनीतिक अनिश्चितता के दौर में विदेशी मुद्रा भंडार की मजबूती बहुत महत्वपूर्ण है।

राजीव वर्मा कहते हैं कि डीजल पेट्रोल और सोने की खपत कम करने के लिए देशवासियों से की गई अपील कम अवधि में राहत जरूर दे सकती है, लेकिन हमें लंबी अवधि में इसका समाधान निकालना होगा क्योंकि हम इनके लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर हैं।
दुनिया दिनोंदिन अनिश्चित होती जा रही है। ऐसे में पश्चिम एशिया जैसे संकट बार-बार पैदा होने की संभावना है। हमें ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और सोने की खपत घटाने के टिकाऊ तरीके खोजने होंगे। तभी हम अपनी अर्थव्यवस्था को इस तरह के संकट से नकारात्मक तौर पर प्रभावित होने से बचा पाएंगे।
उदय राज कहते हैं कि आयात भारत की अर्थव्यवस्था के लिए लंबे समय से एक समस्या बना हुआ है। सोने की लोकप्रियता को देखते हुए कोई भी सरकार इसके आयात पर अंकुश के लिए कड़े कदम नहीं उठाना चाहती है। सोना काले धन को छिपाने का भी हथियार है।
पिछले कुछ वर्षों के दौरान सोने की कीमतें बहुत तेजी से बढ़ी हैं। ऐसे में लोग निवेश के लिहाज से भी सोना खरीद रहे हैं। हालांकि, यह एक अनुत्पादक संपत्ति है। सरकार को भारतीय परिवारों के पास मौजूद सोने के एक हिस्से को मोनेटाइज करने के लिए एक आकर्षक स्कीम लानी चाहिए। इससे सोने का आयात कम होगा और सरकार को विभिन्न क्षेत्रों में निवेश के लिए बड़ी रकम मिलेगी। ऐसे में हमें निवेश के लिए विदेशी पूंजी का इंतजार नहीं करना होगा।
