'समाज को बांटने वाली ताकतों के खिलाफ एकजुट होना होगा', चिन्मय अमृत महोत्सव में बोले पीएम मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने चिन्मय अमृत महोत्सव में समाज को बांटने वाली ताकतों के खिलाफ एकजुट होने और नागरिकों को आत्मनिर्भर बनाने का आह्वान किया।
-1792770496685_m.webp)
समाज को बांटने वाली ताकतों के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान
HighLights
समाज को बांटने वाली ताकतों के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान
नागरिकों को आत्मनिर्भरता के लिए प्रेरित कर विकसित भारत का लक्ष्य
चिन्मय मिशन को एक विचार और शुद्ध चेतना बताया पीएम ने
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को समाज में उभरती बुराइयों और नई चुनौतियों से निपटने, समाज के बांटने वाली ताकतों के खिलाफ लोगों को एकजुट करने तथा नागरिकों को आत्मनिर्भरता के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।
चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए मोदी ने कहा कि चिन्मय मिशन केवल एक संस्था नहीं, बल्कि एक विचार है। उन्होंने कहा कि ‘चिन्मय’ का अर्थ शुद्ध चेतना है और इस मिशन की यात्रा कई दशकों से आध्यात्मिक संकल्पों से जुड़ी रही है।
समाज को बांटने वाली ताकतों के खिलाफ एकजुट होने को कहा
प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते दशकों में समय बदला है, देश के सामने नई चुनौतियां आई हैं और समाज में नई बुराइयां उभरी हैं। इन समस्याओं का समाधान करने की जिम्मेदारी सभी की है।
उन्होंने कहा, ‘हमें समाज को बांटने वाली ताकतों के खिलाफ एकजुट होना होगा। नागरिकों को जागरूक बनाते हुए उन्हें आत्मनिर्भरता के लिए प्रेरित करना होगा। प्रत्येक व्यक्ति को 2047 तक विकसित भारत के संकल्प से जोड़ना होगा।’ मोदी ने कहा कि भारत की संस्कृति राष्ट्र की पहचान और उसके अस्तित्व का आधार है।
चिन्मय मिशन के प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आज लाखों युवा भारत के सांस्कृतिक मूल्यों के दूत के रूप में काम कर रहे हैं और इन मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचा रहे हैं।
शुक्रवार से शुरू हुआ तीन दिवसीय सम्मेलन भारत और विदेशों के 9,000 से अधिक प्रतिभागियों को एक मंच पर ला रहा है। यह आयोजन चिन्मय मिशन की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में सालभर चले समारोहों का समापन है।
स्वामी चिन्मयानंद ने 1951 में इस वैश्विक आध्यात्मिक आंदोलन की स्थापना की थी। इसका उद्देश्य वेदांत और भगवद्गीता के ज्ञान को आम लोगों तक पहुंचाना है।
बांग्लादेश और नेपाल में जो हुआ, वह भारत में नहीं हो सकता: स्वामी मित्रा
नंदइस दौरान चिन्मय मिशन के संत स्वामी मित्रानंद सरस्वती ने कहा है कि बांग्लादेश और नेपाल में युवाओं के नेतृत्व में हुए राजनीतिक विरोध जैसी स्थिति भारत में नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि भारतीय युवा अपनी सभ्यता, संस्कृति और परंपराओं से गहराई से जुड़े हैं।
स्वामी सरस्वती ने कहा कि आज की पीढ़ी के सामने सबसे बड़ी चुनौती सूचना और ज्ञान के बीच अंतर समझना है। उनके अनुसार, केवल जानकारी होना बुद्धिमत्ता नहीं है, बल्कि जीवन के अनुभव और आध्यात्मिक समझ से वास्तविक विवेक विकसित होता है। उन्होंने राष्ट्रसेवा को ईश्वर की सेवा के समान बताया।
(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
