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पीएम मोदी ने ‘गुड महाराजा’ को किया याद, द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान पोलिश बच्चों को दिया था आश्रय

Published: Thu, 22 Oct 2026 11:47 PM (GMT+05:30)

प्रधानमंत्री मोदी ने पोलैंड के पीएम डोनाल्ड टस्क से बातचीत में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पोलिश बच्चों को आश्रय देने वाले नवानगर के महाराजा जाम साहेब को याद किया।

पीएम मोदी ने नवानगर के महाराजा जाम साहेब को याद किया (फोटो-PTI)

पीएम मोदी ने नवानगर के महाराजा जाम साहेब को याद किया (फोटो-PTI)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। हैदराबाद हाउस में वीरवार को पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनल्ड टस्क से बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नवानगर के महाराजा जाम साहेब की मानवीय विरासत को भी स्मरण किया। जाम साहेब ने द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान विस्थापित पोलिश बच्चों को आश्रय प्रदान किया था।

दोनों प्रधानमंत्रियों की द्विपक्षीय वार्ता के बाद मीडिया को दिए बयान में मोदी ने बताया कि पोलैंड के लोग जाम साहेब को बहुत सम्मान से याद करते हैं। द्वितीय विश्वयुद्ध की त्रासदी के कारण विस्थापित हुए पोलिश बच्चों को आश्रय देने वाले नवानगर के महाराजा जाम साहेब, सर दिग्विजय सिंह जी रणजीत सिंह जी जडेजा की कहानी दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों का एक अहम पहलू है।

पोलैंड में उन्हें ‘गुड महाराजा’ के नाम से जाना जाता है और वारसा के एक चौक का नाम ‘गुड महाराजा स्क्वायर’ है।

गुजरात के वर्तमान जामनगर में नवानगर के शाही परिवार के अलावा महाराष्ट्र के कोल्हापुर के तत्कालीन शाही परिवार ने भी युद्ध के कारण विस्थापित पोलिश महिलाओं और बच्चों को शरण दी थी।

टस्क की उपस्थिति में मोदी ने कहा- भारत और पोलैंड की मित्रता केवल राजनयिक संबंधों पर आधारित नहीं है, बल्कि यह मानवता और करुणा की साझा विरासत पर टिकी है।" उन्होंने बताया कि द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जामनगर और कोल्हापुर के शाही परिवारों ने भारत में हजारों पोलिश बच्चों और परिवारों को आश्रय दिया।

मोदी ने 2022 में संघर्षग्रस्त यूक्रेन से भारतीय छात्रों की सुरक्षित वापसी में पोलैंड के प्रयासों को भी याद किया। उन्होंने कहा- पोलैंड ने मानवता की इसी भावना को आगे बढ़ाया।

मोदी ने यह भी बताया कि जाम साहेब स्मारक युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत पोलैंड के युवा भारत आ रहे हैं, जिससे हमारी ऐतिहासिक मित्रता नई पीढ़ी तक पहुंचेगी। इस कार्यक्रम की घोषणा मोदी ने अगस्त 2024 में पोलैंड की राजकीय यात्रा के दौरान की थी।

यह भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी के लिए पंचवर्षीय कार्ययोजना (2024-2028) का हिस्सा है। इस कार्यक्रम के तहत हर साल पोलैंड के युवाओं का भारत से आदान-प्रदान होगा, जिसमें प्रतिभागियों को भारत के इतिहास, संस्कृति, संस्थानों और समकालीन विकास को जानने का अवसर मिलेगा।

टस्क ने पोलिश भाषा में कहा कि मोदी ने एक ऐसी बात का जिक्र किया, जो आज भी हमारी यादों में जीवंत है—"गुड महाराजा।" उन्होंने कहा-" वह हमारे दिलों में बसे हुए हैं। यह केवल प्रतीक नहीं है, बल्कि व्यावहारिक मदद की बात है।"

पोलैंड के दूत पिओत्र अंतोनी स्विताल्स्की ने दिल्ली में एक कार्यक्रम में कहा कि ‘गुड महाराजा’ भारत-पोलैंड के लोगों के दिलों में एक खास स्थान रखता है। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान 1942 से 1948 के बीच करीब 5,000 पोलिश शरणार्थियों कोल्हापुर के पास वलीवडे में आश्रय मिला था।

पोलैंड के दूतावास ने बताया कि यह बस्ती एक जीवंत ‘छोटे पोलैंड’ में बदल गई थी जहां स्कूल, चर्च और सामुदायिक जीवन ने परिवारों को उम्मीद और गरिमा दी।

(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)