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'पीएम मोदी ने सेना को दी थी कार्रवाई की पूरी छूट', ऑपरेशन सिंदूर पर बोले पूर्व सीडीएस अनिल चौहान

Published: Wed, 26 Aug 2026 11:31 PM (IST)

पूर्व सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने बताया कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के लिए पीएम मोदी ने सेना को कार्रवाई की पूरी ...और पढ़ें

ऑपरेशन सिंदूर पर बोले पूर्व सीडीएस अनिल चौहान। (एएनआई)

ऑपरेशन सिंदूर पर बोले पूर्व सीडीएस अनिल चौहान। (एएनआई)

HighLights

  1. पीएम मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर के लिए सेना को दी थी पूरी छूट।

  2. सेना को समय तय करने और विफलता की गुंजाइश खत्म करने को कहा।

  3. अभियान के पुख्ता सबूत जुटाने का भी दिया गया था निर्देश।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने बताया है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' को अंजाम देने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सैन्य बलों को कार्रवाई की पूर्ण स्वतंत्रता दी थी।

उनसे कहा था कि वे ऑपरेशन का समय खुद तय करें। साथ ही, यह सुनिश्चित करने को कहा था कि इस अभियान की विफलता की कोई गुंजाइश न रहे।

राजनीतिक इच्छाशक्ति और स्पष्ट निर्देश

विवेकानंद सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में जनरल चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 24 अप्रैल को पटना में दिए अपने भाषण में ही यह स्पष्ट कर दिया था कि सीमा पार आतंकवाद को अब कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इस हमले के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

कूटनीति, आर्थिक ताकत और व्यापार से जुड़े फैसले 23 अप्रैल को ही ले लिए गए थे। "प्रधानमंत्री ने हमसे केवल एक ही बात कही कि उन पर तत्काल कार्रवाई का कोई राजनीतिक दबाव नहीं है। आप अपनी सुविधानुसार समय तय करें, लेकिन यह सुनिश्चित करें कि मानवीय या तकनीकी कारणों से विफलता की कोई गुंजाइश न हो।"

सैन्य विकल्पों पर मंथन और समय का चयन

सैन्य कार्रवाई के तौर-तरीकों पर चर्चा करने के लिए 23 से 29 अप्रैल के बीच कई उच्च स्तरीय बैठकें हुईं। 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी की बैठक में यह सख्त निर्णय लिया गया कि पाकिस्तान को कड़ा सबक सिखाया जाना जरूरी है।

जनरल चौहान के अनुसार, प्रधानमंत्री ने सेना को चार मुख्य निर्देश दिए - 'कार्रवाई की पूरी छूट। जल्दबाजी न करके सही समय का चुनाव। विफलता की गुंजाइश को पूरी तरह खत्म करना। की गई कार्रवाई के पुख्ता सबूत जुटाना।'

पूर्व सीडीएस ने कहा कि किसी भी सैन्य बल के लिए इससे बेहतर राजनीतिक मार्गदर्शन और पूर्ण स्वतंत्रता और कुछ नहीं हो सकती। इस स्पष्ट दिशा-निर्देश ने सेना का हौसला और अधिक बढ़ा दिया।

(समाचार एजेंसी एएनआई के इनपुट के साथ)