प्रौद्योगिकी और दुर्लभ खनिजों का हथियारों के तौर पर इस्तेमाल खतरनाक, ब्रिक्स सम्मेलन का समापन पर बोले पीएम मोदी
पीएम मोदी ने ब्रिक्स सम्मेलन के समापन सत्र में दुर्लभ खनिजों और प्रौद्योगिकी को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने को खतरनाक बताया।

प्रौद्योगिकी और दुर्लभ खनिजों का हथियारों के तौर पर इस्तेमाल खतरनाक।
HighLights
दुर्लभ खनिजों, प्रौद्योगिकी को हथियार बनाना खतरनाक: पीएम मोदी।
वैश्विक तनावों, आपूर्ति श्रृंखला पर ब्रिक्स देशों को किया आगाह।
ग्लोबल साउथ के लिए ब्रिक्स समाधानों पर पीएम मोदी का जोर।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। हाल के दिनों में चीन ने दुलर्भ खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) की आपूर्ति को रोक लिया था। जाहिर तौर पर उसमें राजनीति भी थी। पीएम नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स देशों को इसके प्रति आगाह किया है। 13 सितंबर को ब्रिक्स सम्मेलन के अंतिम सत्र को संबोधित करते हुए पीएम मोदी वैश्विक तनावों की वजह से आम जनता के जन-जीवन पर होने वाले असर की बात भी कही।
ब्रिक्स सम्मेलन के सफल आयोजन और इसके तहत तय कार्यक्रमों के जरिए विकासशील व गरीब देशों को फायदा पहुंचाने की अपील करते हुए भारतीय पीएम ने पर्यावरण, स्वास्थ्य, सप्लाई चेन जैसे मुद्दों पर तत्परता से एक दूसरे के सहयोग की व्यवस्था बनाने की अपील की।
पीएम मोदी जब इस सत्र को संबोधित कर रहे थे तो इसमें ब्रिक्स के 11 सदस्य देशों के अलावा 10 साझेदार देशों के शीर्ष नेतृत्व के अलावा पांच अन्य वैश्विक समूहों (आसियान, अफ्रीकी यूनियन आदि) का नेतृत्व भी उपस्थित था।
प्रौद्योगिकी और दुर्लभ खनिजों का हथियारों के तौर पर इस्तेमाल खतरनाक- पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा कि, “प्रौद्योगिकी व क्रिटिकल मिनिरल्स का हथियारों की तरफ इस्तेमाल करना हमारी साझा प्रगति में बाधा बन सकता है। इसलिए हमने प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल में सभी को साथ लेकर चलने पर बल दिया है।” पीएम मोदी जब यह बात कह रहे थे उनसे थोड़ी ही दूरी पर चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग भी बैठे थे।
वैसे चिनफिंग के भारत दौरे व ब्रिक्स में उनकी उपस्थिति से भारत व चीन के संबंधों में काफी सकारात्मकता देखने को मिली है लेकिन पीएम मोदी ने क्रिटिकल मिनिरल्स को हथियारों के तौर पर इस्तेमाल करने की बात करके यह बताया है कि चीन की तरफ से कुछ मुद्दों पर ध्यान देना जरूरी है।
सनद रहे कि अप्रैल, 2025 में चीन ने रेअर अर्थ समेत कुछ अन्य धातुओं के निर्यात को सीमित कर दिया था जिससे भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग को भी काफी समस्या का सामना करना पड़ा था। मोदी और चिनफिंग के बीच 12 सितंबर, 2026 को हुई बैठक में भी यह मुद्दा उठा था।
पीएम मोदी ने कहा कि ग्लोबल साउथ के विकासशील देश ब्रिक्स पर बढ़ता भरोसा इसलिए जता रहे हैं क्योंकि उनकी आवाज सुनी जाती है, उनके अनुभवों को महत्व दिया जाता है और समाधान उन पर थोपने की बजाय उनके साथ साझेदारी में बनाए जाते हैं।
विश्व की लगभग 49.5 प्रतिशत आबादी और वैश्विक जीडीपी का करीब 40 प्रतिशत प्रतिनिधित्व करने वाले 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के समूह ब्रिक्स का वार्षिक शिखर सम्मेलन लॉजिस्टिक्स सप्लाई चेन, स्टार्टअप्स और संक्रामक रोग नियंत्रण जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण परिणामों के साथ संपन्न हुआ।
मोदी ने कहा कि “आज यह सभागार अलग-अलग महाद्वीपों, संस्कृतियों और विकास यात्राओं को एक साथ जोड़ रहा है। यह ब्रिक्स की बढ़ती ताकत, आकर्षण और अभूतपूर्व विश्वास का प्रमाण है।”
अंतिम सत्र में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति रामाफोसा, मलेशिया के पीएम अनवर, मिस्र के राष्ट्रपति अल-सिसी, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रोबोवो जैसे दिग्गज वैश्विक नेता उपस्थित थे। डब्लूटीओ, यूएन, डब्लूएचओ जैसे संगठनों के प्रमुखों ने भी हिस्सा लिया।
कोई भी संकट एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता- पीएम मोदी
पीएम मोदी ने आगे कहा कि आज विश्व में तनावों की संख्या लगातार बढ़ रही है, और सामान्य मानव के जीवन पर इसका बहुत नकारात्मक प्रभाव भी हो रहा है और व्यापक प्रभाव भी हो रहा है। महामारियों, पर्यावरण आपदाओं और सप्लाई चेन में गड़बड़ी ने दिखाया है कि एक दूसरे पर आश्रित दुनिया में कोई भी संकट एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता।
इसलिए चुनौतियों को समय रहते पहचानना, उनके लिए तैयार रहना और तुरंत कार्रवाई करना भी उतना ही आवश्यक है। इसके साथ ही पीएम ने ब्रिक्स के नई दिल्ली घोषणा पत्र में आपसी सहयोग जैसे बीमारियों को रोकने के लिए पूर्वचेतवानी सिस्टम की स्थापना, ब्रिक्स देशों के बीच आपदा प्रबंधन में सहयोग, सप्लाई चेन में भरोसे को बढ़ाने जैसे कदमों की घोषणाओं का जिक्र किया।
उन्होंने बताया कि ब्रिक्स नेटवर्क आन डिजिटल एग्रीक्लचर किसानों के लिए नई संभावनाएं तैयार करेगा। इसके माध्यम से एआइ, भूस्थानिक प्रौद्योगिकी और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को किसानों की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ा जाएगा।
पीएम मोदी ने यह भी विस्तार से बताया कि किस तरह से सम्मेलन की घोषणाओं को आम जनता के हितों जैसे रोजगार सृजन, शोध, महिलाओं की स्थिति सुधारने में इस्तेमाल हो सकेगा।
अंत में भारतीय पीएम ने कहा कि, “ब्रिक्स में विकसित सोल्यूशंस का लाभ केवल ब्रिक्स तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इन्हें ग्लोबल साउथ की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जाना चाहिए। हमारी विविधता हमारी पहचान रहे, हमारा सहयोग हमारी प्रेरणा बने, और हमारी प्रगति पूरी मानवता के काम आए।”
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