नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की मुलाकात में रिश्तों को नए आयाम देने की कोशिश की गई। निर्धारित कार्यक्रम को परे रखकर दिए गए साझा बयान में दोनों नेताओं ने संबंधों को सुधारने पर जोर दिया। वार्ता प्रक्रिया के जरिए पुरानी समस्याओं के व्यावहारिक नतीजे निकालने और संबंधों का नया मॉडल बनाने पर रजामंदी जताई। दोपहर भोज से पहले हुई बातचीत ने मनमोहन सिंह के पहले पाकिस्तान दौरे की जमीन भी तैयार की।

सिंह ने जरदारी के न्योते को तो स्वीकार लिया लेकिन यह भी संकेत दिया कि दौरे के पहले दोनों मुल्कों को नतीजों का ठोस मंच तैयार करना होगा।

दोपहर करीब 12 बजे नई दिल्ली पहुंचे पाकिस्तानी राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच भोजन से पहले 40 मिनट तक अकेले में गुफ्तगू हुई। विदेश सचिव रंजन मथाई ने इस बात की तस्दीक की कि सीधी और खुली बातचीत को जगह देने के लिए दोनों नेताओं के साथ कोई नोट लेने वाला भी नहीं था।

प्रधानमंत्री ने जरदारी के साथ बातचीत पर संतोष जताते हुए कहा कि भारत और पाकिस्तान के संबंध सामान्य हो यह हमारी साझा इच्छा है। दोनों मुल्कों के बीच लंबित मुद्दों का सुनियोजित और व्यावहारिक समाधान निकालने की जरूरत है।

मनमोहन सिंह को न्योता देते हुए जरदारी ने कहा कि हम पाकिस्तानी जमीन पर जल्द ही मुलाकात की उम्मीद करते हैं। पाक राष्ट्रपति के आमंत्रण को स्वीकारते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें पाकिस्तान का दौरा करने में खुशी होगी।

महत्वपूर्ण है कि जनवरी, 2004 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के पाक दौरे के बाद पाकिस्तान के राष्ट्राध्यक्ष तो भारत आए हैं, लेकिन भारतीय प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान का दौरा नहीं किया है।

विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री का पाकिस्तान दौरा तारीखों की उपलब्धता और ठोस नतीजों की शक्ल से तय होगा।

सूत्रों ने संकेत दिए कि तकनीकी तौर पर समाधान के करीब खड़े सर क्रीक मुद्दे समेत कुछ बिंदुओं को नतीजों की उस फेहरिस्त में जगह मिल सकती है जिसका प्रधानमंत्री अपने पाकिस्तान दौरे में एलान करना पसंद करेंगे।

विदेश सचिव रंजन मथाई ने बताया कि चर्चा के दौरान राष्ट्रपति जरदारी ने कश्मीर, सियाचिन और सर क्रीक समेत सभी मुद्दों के समाधान पर सहमति जताई। दोनों ने चरणबद्ध तरीके से बातचीत पर जोर दिया।

मथाई के अनुसार बातचीत के दौरान सरहद पार लोगों को जोड़ने वाले उपायों को अहमियत दी गई। साथ ही क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने के मुद्दे पर भी रजामंदी नजर आई। इतना ही नहीं दोनों मुल्कों ने भारत-चीन संबंधों की तर्ज पर व्यापारिक रिश्तों को आगे ले जाने का मॉडल विकसित करने की जरूरत को स्वीकार किया।

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