नई दिल्ली, (जेएनएन)। केंद्र सरकार ने इराक में मारे गए भारतीयों के परिवार वालों को 10 लाख का मुआवजा देने की घोषणा की है। बता दें कि युद्धग्रस्त इराक में आतंकी संगठन आइएस द्वारा मारे गए 39 भारतीयों में से 38 के अवशेषों को सोमवार को भारत लाया गया था। शव को परिजनों को सौंप दिया गया। सभी का अंतिम संस्कार भी  कर दिया गया।

बड़ी मुश्किल से मैच हुआ डीएनए सैंपल

अमृतसर में पत्रकारों से बात करते हुए वीके सिंह ने कहा, 'बहुत मुश्किल से मृतकों का डीएनए सैंपल मैच हुआ है। ट्रेंड लोगों ने पूरी ताकत झोंककर मृतकों के डीएनए सैंपल मैच कराए हैं। यह काफी मुश्किल काम था। भारत सरकार की तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ी गई थी। मैं चार बार इराक गया था। इसके बाद भारतीयों के अवशेष लाए जा सके हैं।' वीके सिंह ने आगे कहा, 'मैं पहली बार 11 जुलाई को इराक गया था। उस समय वहां युद्ध पूरी तरह खत्म नहीं हो चुका था। उस समय हमें जो वहां जानकारी मिली वह लेकर मैं चला आया। फिर अक्टूबर में मैं फिर इराक गया। जहां भारतीय लोग काम करते थे उस फैक्ट्री के मालिक को पकड़ा और उससे भारतीयों की जानकारी मांगी। रेडियो पर उदघोषणा करवाई। मोसुल के बदूश पहाड़ी में भारतीयों के अवशेष मिले।'

पीड़ितों को नौकरी और 5 लाख मुआवजा देगी पंजाब सरकार

इस बीच पंजाब सरकार ने मारे गए लोगों के परिजनों को 5 लाख रुपये का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया है।

बता दें कि विमान में पंजाब के 27, बिहार के छह, हिमाचल के चार और बंगाल के दो लोगों के अवशेष भारत पहुंचे हैं। जानकारी के मुताबिक 39वें शव के डीएनए सहित अन्य जांच की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। ऐसे में इसके लिए बाद में प्रयास किया जाएगा। वीके सिंह ने बताया कि परिजनों को किसी प्रकार का शक न हो, इसलिए शव सौंपते समय उन्हें सबूत भी उपलब्ध कराए जाएंगे।

बता दें कि सभी मारे गए भारतीयों के अवशेष को ताबूत में रखा गया है। वीके सिंह ने खुद सहारा देकर सभी ताबूतों को विमान में रखा। वीके सिंह ने ट्वीट कर कहा कि कुछ जिम्मेदारियों का बोझ काफी ज्यादा होता है।

इराक में भारत के राजदूत प्रदीप सिंह राजपुरोहित ने बताया कि सबसे पहले विमान अमृतसर एयरपोर्ट पर पहुंचेगा। इसके बाद विमान पटना तथा कोलकाता पहुंचेगा, जहां परिजनों को शव सौंपे जाएंगे।

मालूम हो कि इसी महीने की शुरुआत में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संसद को बताया था कि जून 2014 में इराक के मोसुल से आइएस ने 40 भारतीयों का अपहरण कर लिया था। उनमें से एक व्यक्ति खुद को बांग्लादेशी मुस्लिम बता कर वहां से निकल आया और बाकी 39 भारतीयों की हत्या कर दी गई। उनके शवों की पहचान डीएनए जांच से हुई है। उनके इस बयान के बाद विपक्ष ने सुषमा पर देश को गुमराह करने का आरोप लगाया था। लेकिन सुषमा स्वराज का कहना था कि उनके पास उन भारतीयों के जीवित या मृत होने के कोई पुख्ता प्रमाण नहीं थे। इसलिए बगैर प्रमाण वह किसी को मृत घोषित नहीं कर सकती थीं।

Posted By: Arti Yadav

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