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नोएडा-ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी को तगड़ा झटका, सुरक्षित कर्जदाता का दर्जा देने की याचिका खारिज

Published: Fri, 18 Sep 2026 07:12 AM (IST)

एनसीएलएटी ने रियल एस्टेट कंपनी शुभकामना बिल्डटेक की दिवाला प्रक्रिया में सुरक्षित कर्जदाता का दर्जा देने के अनुरोध वाली नोएडा ...और पढ़ें

नोएडा, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरणों को सुरक्षित कर्जदाता का दर्जा देने की याचिका खारिज

नोएडा, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरणों को सुरक्षित कर्जदाता का दर्जा देने की याचिका खारिज

HighLights

  1. नोएडा, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरणों को सुरक्षित कर्जदाता का दर्जा देने की याचिका खारिज

  2. दोनों प्रा​धिकरणों ने शुभकामना बिल्डटेक के लिए रिजोल्यूशन प्लान को मंजूरी देने वाले एनसीएलटी के आदेश को दी थी चुनौती

पीटीआई, नई दिल्ली। राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने रियल एस्टेट कंपनी शुभकामना बिल्डटेक की दिवाला प्रक्रिया में सुरक्षित कर्जदाता का दर्जा देने के अनुरोध वाली नोएडा और ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरणों की अपील खारिज कर दी है।

दोनों प्राधिकरणों ने शुभकामना बिल्डटेक के लिए रिजोल्यूशन प्लान को मंजूरी देने वाले राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के 2022 के आदेश को चुनौती दी थी।

एनसीएलएटी की दो सदस्यीय पीठ ने कहा कि दिवाला और दिवालियापन संहिता (इन्साल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड-आइबीसी) में 2026 में किया गया संशोधन कानून के आधार पर बने शुल्क को सुरक्षित हित मानने की अनुमति नहीं देता। इसके साथ ही पीठ ने दोनों प्राधिकरणों को असुरक्षित परिचालन ऋणदाता मानने के पहले के फैसले को बरकरार रखा।

नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (एनओआइडीए) ने 99.32 करोड़ रुपये और ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण प्राधिकरण (जीएनआइडीए) ने 60.64 करोड़ रुपये के बकाये का दावा किया था। समाधान योजना में इनके लिए क्रमशः 25 करोड़ रुपये और 18.5 करोड़ रुपये का प्रविधान किया गया था।

प्राधिकरणों ने शीर्ष कोर्ट के ‘राज्य कर अधिकारी बनाम रेनबो पेपर्स लिमिटेड’ और ‘ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण बनाम प्रभजीत सिंह सोनी’ मामलों के फैसलों का हवाला दिया था। हालांकि, एनसीएलएटी ने कहा कि 26 मई, 2026 से लागू संशोधन के बाद केवल कानून के आधार पर बने शुल्क के जरिये ‘सुरक्षा हित’ का दावा नहीं किया जा सकता।

एनसीएलएटी ने कहा कि दोनों प्राधिकरणों और कंपनी के बीच हुए जमीन के पट्टे के दस्तावेजों में सभी बकायों पर सामान्य और बिना शर्त शुल्क का प्रविधान नहीं था।

घर खरीदारों की ओर से पेश वकील आदित्य पारोलिया ने कहा कि दोनों प्राधिकरणों के दावों और समाधान योजना में किए गए प्रविधान के बीच लगभग 116 करोड़ रुपये का अंतर था। अपील मंजूर होने पर यह राशि घर खरीदारों पर अतिरिक्त बोझ बन सकती थी।

उन्होंने कहा कि फैसले के बाद शुभकामना सिटी और शुभकामना टेकहोम्स परियोजनाओं के घर खरीदारों को समाधान योजना के तहत अतिरिक्त भुगतान नहीं करना पड़ेगा।

समाधान योजना को ऋणदाताओं की समिति ने 87 प्रतिशत से अधिक मतों से मंजूरी दी थी। एनसीएलएटी के निर्देश पर हुए मतदान में हिस्सा लेने वाले 95.6 प्रतिशत घर खरीदारों ने दोनों प्राधिकरणों को सुरक्षित लेनदार का दर्जा देने के खिलाफ मतदान किया था।